4 बार भारत से भिड़ चुका हैं पाक, हर बार पीटकर ही लौटा...

नई दिल्ली (29 सितंबर): एलओसी पार करके भारतीय से‍ना ने सर्जिकल स्ट्राइक करके यह दिखा दिया कि वह किसी भी हालात में पाकिस्तान को धूल चटाने का माद्दा रखती है। भारतीय सेना से पीटा पाकिस्तान भी हर बार की तरह इस बार भी कह रहा है कि हमारे सेना के जवान सीजफायर में मारे गए हैं और भारत ने कोई सर्जिकल स्ट्राइक नहीं की।

हालांकि पाकिस्तान के लिए यह कोई नई बात नहीं है, क्योंकि इससे पहले भी चार बार पाकिस्तान ने भारत से भिड़ने की कोशिश की और अंत में हाथ जोड़कर ही पीछा छुड़ाया।

1947-48 का युद्ध भारत और पाकिस्तान के बीच हुए पहले युद्ध की वजह कश्मीर बना था। आजादी के समय जम्मू-कश्मीर की रियासत और उसके राजा हरि सिंह ने भारत और पाकिस्तान दोनों में किसी में विलय स्वीकार नहीं किया था। लेकिन भारत विभाजन के चंद महीनों बाद ही पाकिस्तान समर्थक कबायलियों ने विद्रोह कर दिया। जब कबायली को पाकिस्तानी सेना ने सीधा समर्थन देना शुरू कर दिया तो कश्मीर के राजा ने भारत में विलय स्वीकार करते हुए समझौता कर लिया और भारतीय सेना उनके बचाव में युद्ध में उतर पड़ी। अक्टूबर 1947 से शुरू हुए इस संघर्ष का समापन 1 जनवरी 1949 में दोनों देशों के बीच हुए शांति समझौते से हुआ। इस युद्ध में करीब 1500 भारतीय मारे गए और करीब 3500 घायल हो गए। वहीं करीब 6000 पाकिस्तानियों की युद्ध में जान गई और करीब 14 हजार घायल हो गए। इस युद्ध के बाद जम्मू-कश्मीर के दो तिहाई हिस्सा भारत में ही रहा जबकि एक तिहाई हिस्से पर आज भी पाकिस्तान का कब्जा है।

1965 का युद्ध 1965 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए युद्ध कारण कश्मीर था। पाकिस्तान ने कश्मीर में विद्रोह कराने की मंशा से ऑपरेशन जिब्राल्टर शुरू किया। इस ऑपरेशन के तहत करीब आठ हजार (ज्यादातर गैर-सैनिक) लड़ाकों को कश्मीर भेजा गया। उनका नेतृत्व पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर की एक नियमित बटालियन कर रही थी। कुछ अति प्रशिक्षित पाकिस्तानी कमांडो भी उनके साथ भेजे गए थे। पाकिस्तान को उम्मीद थी कि जब ये घुसपैठिए भारतीय सेना से मुठभेड़ करेंगे तो कश्मीरी अवाम उनके पक्ष में विद्रोह कर देगी। युद्ध मामलों के जानकार मानते हैं कि पाकिस्तान को उम्मीद ही नहीं थी कि भारत इस घुसपैठ के जवाब में सीधा सैन्य हमला कर देगा लेकिन ऐसा ही हुआ।

भारतीय सेना ने 6 सितंबर 1965 को पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध छेड़ दिया। अगले 22 दिनों तक दोनों देशों में जमकर लड़ाई हुई। स्वतंत्र स्रोतों के अनुसार इस युद्ध में भारत के करीब 3000 सैनिक और पाकिस्तान के करीब 3800 हजार सैनिक मारे गए।भारतीय वायु सेना के 59 लड़ाकू विमान युद्ध में नष्ट हो गए। वहीं पाकिस्तानी वायु सेना के 43 लड़ाकू विमान बर्बाद हुए। युद्ध में भारत के 128 टैंक नष्ट हो गए। वहीं पाकिस्तान के 150 टैंक बर्बाद हो गए और 152 टैंकों को भारत ने अपने कब्जे में ले लिया। युद्ध के बाद भारत ने पाकिस्तान की 1840 वर्ग किलोमीट जमीन पर कब्जा कर लिया तो पाकिस्तान ने भारत की 540 वर्ग किलोमीटर भूमि हथिया ली। 1965 के युद्ध का समापन दोनों देशों के बीच हुए ताशकंद समझौते के रूप में हुआ। ये समझौता भारतीय प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री और पाकिस्तानी राष्ट्रपति अयूब खान के बीच हुआ था। रूस ने शांति समझौते में मध्यस्थता की थी।

1971 का युद्ध 1971 के युद्ध की आधारशिला पाकिस्तान में दिसंबर 1970 में हुए आम चुनाव में रखी गई। इस चुनाव में पाकिस्तान की नेशनल एसेंबली की कुल 300 सीटों में से शेख मुजीबुर्रहमान की अवामी लीग को 160 पर जीत मिली। वहीं जुल्फीकार अली भुट्टो की पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (पीपीपी) को 81 सीटों पर सफलता हाथ लगी। बाकी सीटें अन्य छोटी पार्टियों को मिलीं। चुनाव की खास बात ये रही कि शेख मुजीब की अवामी लीग को पश्चिमी पाकिस्तान में एक भी सीट पर जीत नहीं मिली। वहीं भुट्टो को पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) में एक भी सीट नहीं मिली। उस चुनाव से पहले तक पाकिस्तानी सत्ता पर पश्चिमी पाकिस्तान के नेताओं का वर्चस्व रहा था। पाकिस्तानी सेना और खुफिया एजेंसियों में भी पश्चिमी पाकिस्तान के रहने वालों का ज्यादा प्रभाव था। चुनाव में स्पष्ट बहुमत मिलने के बाद भी जब शेख मुजीब की सरकार नहीं बन पाई तो उन्होंने सात मार्च 1971 को बांग्लादेश को अलग राष्ट्र घोषित कर दिया। पाकिस्तानी सेना ने मौजूदा बांग्लादेश पर क्रूर सैन्य कार्रवाई कर दी। पाक सेना को जमात-ए-इस्लामी जैसे संगठनों का भी साथ मिला। बड़े पैमाने पर फैली सैन्य और नागरिक हिंसा के कारण करीब एक करोड़ बांग्लादेशी भारत में पलायन कर गए। दिसंबर 1971 में भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने बांग्लादेशियों की मदद का फैसला करते हुए भारतीय सेना को युद्ध का आदेश दे दिया।

1971 की लड़ाई मात्र 13-14 दिनों तक चली। बांग्लादेश के ढाका में करीब 90 हजार पाकिस्तानी सैनिकों ने भारतीय सेना के आगे हथियार डाल दिए। लड़ाई में दो हजार भारतीय सैनिक और छह हजार पाकिस्तानी सैनिक मारे गए।  16 दिसंबर 1971 को बांग्लादेश का नए देश के रूप में जन्म हुआ। बांग्लादेश मुक्ति संग्राम में मारे गए लोगों की संख्या 5 लाख से 10 लाख के बीच मानी जाती है। वहीं लाखों लोग विस्थापित हुए थे। दोनों सेनाओं के बीच सीधा युद्ध बहुत कम देर चला लेकिन पाकिस्तानी सेना और पाकिस्तान समर्थक लड़ाकों पर बांग्लादेशी की हजारों महिलाओं के संग बलात्कार का आरोप लगा। बांग्लादेश से पलायन करके भारत के विभिन्न इलाकों में शरणार्थी कभी भी पूरी तरह वापस नहीं जा सके। पूर्वोत्तर भारत के कुछ राज्यों में बांग्लादेशी शरणार्थी आज भी राजनीतिक मुद्दा हैं।

1999 कारगिल युद्ध भारत और पाकिस्तान के बीच मई और जुलाई 1999 के बीच कश्मीर के करगिल जिले में हुए सशस्त्र संघर्ष का नाम है। पाकिस्तान की सेना और कश्मीरी उग्रवादियों ने भारत और पाकिस्तान के बीच की नियंत्रण रेखा पार करके भारत की ज़मीन पर कब्ज़ा करने की कोशिश की। पाकिस्तान ने दावा किया कि लड़ने वाले सभी कश्मीरी उग्रवादी हैं, लेकिन युद्ध में बरामद हुए दस्तावेज़ों और पाकिस्तानी नेताओं के बयानों से साबित हुआ कि पाकिस्तान की सेना प्रत्यक्ष रूप में इस युद्ध में शामिल थी।

लगभग 30,000 भारतीय सैनिक और करीब 5,000 घुसपैठिए इस युद्ध में शामिल थे। भारतीय सेना और वायुसेना ने पाकिस्तान के कब्ज़े वाली जगहों पर हमला किया और धीरे-धीरे अंतर्राष्ट्रीय सहयोग से पाकिस्तान को सीमा पार वापिस जाने को मजबूर किया। यह युद्ध ऊँचाई वाले इलाके पर हुआ और दोनों देशों की सेनाओं को लड़ने में काफ़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ा।परमाणु बम बनाने के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच हुआ यह पहला सशस्त्र संघर्ष था।