ISRO की मदद से सेना ने किया PoK में घुस कर हमला

 

नई दिल्ली(30 सितंबर):  उरी हमले पर पाकिस्तान पर जवाबी कार्रवाई के तौर की गई सर्जिकल स्ट्राइक में इसरो की मदद ली गई थी। पहली बार आर्मी के किसी बड़े ऑपरेशन के लिए कार्टोसैट सैटलाइट्स का इस्तेमाल किया गया है। 

- आखिरी बार इस साल जून में कार्टोसैट सैटलाइट लॉन्च की गई थी। एक वेबसाइट के मुताबिक लाइन ऑफ कंट्रोल पर की गई सर्जिकल अटैक में आर्मी को सैटलाइट से मिली हाई रेजॉल्यूशन तस्वीरों से बड़ी मदद मिली थी।

- इसरो और रक्षा मंत्रालय दोनों ने कार्टोसैट परिवार के सैटलाइट के इस्तेमाल पर चुप्पी साध रखी है। इन सैटलाइट को एक्सपर्ट भारत की 'आई इन द स्काई' कहते हैं। कार्टोसैट-2C से भारतीय सेना का सर्विलांस यानी निगरानी तंत्र और मजबूत हो गया है। यह सेना को 0.65 मीटर्स की हाई रेजॉल्यूशन तस्वीरें उपलब्ध करा रहा है जोकि पहले की तुलना में काफी बेहतर रेजॉल्यूशन है।

- कार्टोसैट ने सेना को एरिया ऑफ इंट्रेस्ट (AOI) बेस्ड तस्वीरें उपलब्ध कराईं।

- हैदराबाद स्थित नैशनल रिमोट सेंसिंगसेंटर के मुताबिक (NRSC), AOI प्रॉडक्ट्स दो तरह के होते हैं- स्टैंडर्ड और प्रेसिशन बेस्ड ऑर्थो (जहां अंतरिक्ष से ली गई तस्वीरों को एक यूनिफॉर्म स्केल पर सुधारा जाता है। इन दोनों का ही इस्तेमाल सेना करती हैं। ऑर्थो से सही की गई तस्वीरों में क्षेत्रीय अस्पष्टता और कैमरे के टिल्ट प्रभाव को दूर कर दिया जाता है।

-  यह सैटलाइट केवल एरिया ऑफ इंट्रेस्ट (AOI) की तस्वीरें ही नहीं खींचती है बल्कि अंतरिक्ष से संवेदनशील इलाकों का विडियो भी रेकॉर्ड कर भेजती है।