सुप्रीम कोर्ट में आज से अयोध्या विवाद पर सुनवाई, पूरे देश की टिकी निगाहें


नई दिल्ली ( 8 फरवरी ): अयोध्या राम जन्मभूमि विवाद पर आज से सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू होने जा रही है। इस मामले से जुड़ी कई याचिकाओं पर महत्वपूर्ण सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में होंगी, जिनपर पूरी देश की निगाहें टिकी हुई हैं। पिछली सुनवाई में प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने साफ कर दिया था कि इस मामले की सुनवाई नहीं टाली जाएगी।

देश की सियासत में बड़ा असर रखने वाले इस विवाद को करीब 164 साल हो गए हैं।  सुप्रीम कोर्ट केस से जुड़े अलग-अलग भाषाओं के ट्रांसलेट किए गए 9,000 पन्नों को देखेगा। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुआई वाली बेंच मामले की नियमित सुनवाई करेगी। विवादित ढांचा ढहाए जाने के 25 साल भी पूरे हो गए हैं। 

सुप्रीम कोर्ट के 3 जजों की स्पेशल बेंच इस मामले की सुनवाई करेगी। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के अलावा बेंच में जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस अब्दुल नजीर हैं। माना जा रहा है कि डॉक्युमेंट्स का ट्रांसलेशन पूरा हो गया है। सुन्नी वक्फ बोर्ड के मुताबिक डॉक्युमेंट्स ट्रांसलेशन के चलते सुनवाई नहीं टलेगी। साथ ही अदालत ने भी कहा था कि 8 फरवरी के बाद सुनवाई नहीं टलेगी। सबसे पहले ओरिजनल टाइटल सूट दाखिल करने वाले दलीलें रखेंगे। फिर बाकी अर्जियों पर बात होगी। 

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार तीन जजों की बेंच प्रतिदिन 3 घंटे सुनवाई करेगी। माना जा रहा है कि 30 दिन की कार्यवाही में सभी पक्षों की सुनवाई पूरी हो जाएगी और 16 मई से गर्मी की छुट्टियां शुरू होने से पहले ही बेंच फैसला सुरक्षित कर लेगी।

पिछले साल दिसंबर में 3 जजों की स्पेशल बेंच ने इस मामले की सुनवाई की थी। कोर्ट ने सभी पक्षों से साफ कहा था कि 8 फरवरी से सुनवाई की तारीख नहीं बढ़ेगी। बता दें कि इस मामले से जुड़े 9,000 पन्नों के दस्तावेज और 90,000 पन्नों में दर्ज गवाहियां पाली, फारसी, संस्कृत, अरबी सहित विभिन्न भाषाओं में हैं, जिसपर सुन्नी वक्फ बोर्ड ने कोर्ट से इन दस्तावेजों को अनुवाद कराने की मांग की थी। 

अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट में तमाम पक्षकारों की ओर से विशेष अनुमति याचिका दायर की हुई है। अयोध्या के विवादास्पद ढांचे को लेकर हाईकोर्ट ने 30 सितंबर 2010 में फैसला दिया था। फैसले में कहा गया था कि विवादित जमीन को 3 बराबर हिस्सों में बांटा जाए जिस जगह रामलला की मूर्ति है उसे रामलला विराजमान को दिया जाए। सीता रसोई और राम चबूतरा निर्मोही अखाड़े को दिया जाए जबकि बाकी का एक तिहाई जमीन का हिस्सा सुन्नी वक्फ बोर्ड को दिया जाए।