''मर्जी से वेश्‍यावृति करने पर पुलिस ना करें दखल''

नई दिल्ली (15 फरवरी): सुप्रीम कोर्ट का एक पैनल सेक्स वर्कर्स के जीवन में सुधार लाने के उपाए पर काम कर रहा है। इस मामले में इस पैनल ने एक बड़ी सलाह दी है, जिसमें कहा गया है कि अपनी सहमती से सेक्स वर्क करने वाले एडल्ट्स के मामले में पुलिस को दखलअंदाज़ी नहीं देनी चाहिए और उनके खिलाफ कानूनी कर्रवाई भी नहीं होनी चाहिए।

एक अंग्रेज़ी अख़बार में छपि एक ख़बर के अनुसार, पैनल का कहना है कि सहमती से किया गया सेक्स गैर-कानूनी नहीं है, वेश्यालय भले ही गैर-कानूनी ज़रूर हों। ऐसी स्थिति में अगर कहीं वेश्यालय चलाया जा रहा है तब उसके खिलाफ कानूनी कर्रवाई की जा सकती है। लेकिन अगर कोई वेश्यालय नहीं चला रहा और सेक्स वर्क में अपनी मर्ज़ी से जुड़ा है तो उसके खिलाफ पुलिस कर्रवाई नहीं होनी चाहिए। रिपोर्ट के मुताबिक पैनल का मानना है कि वेश्यावृति से जुड़े कानून का भारी दुरुपयोग होता आया है।

इस पैनल का गठन 2011 में किया गया था और यह मार्च में अपनी रिपोर्ट सौंपेगा। वेश्यावृत्ति देश में कानूनी रूप से मान्य है, लेकिन यह कानून के जाल में उलझा हुआ है। इसके कारण रेड लाइट एरिया में पुलिस की कार्रवाई में सेक्स वर्कर फंस जाते हैं, जहां वे अपना व्यापार सड़कों पर या गंदे वेश्यालयों में करते हैं।