SC की टिप्पणी: दूध में मिलावट करने वालों को हो उम्रकैद

प्रभाकर मिश्रा, नई दिल्ली (5 अगस्त): सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को दूध में मिलावट करने वाले लोगों के संबंध में कड़ी टिप्पणी की। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दूध में कैमिकल्स और सिंथेटिक्स मिलाने पर दोषी पाए जाने वाले लोग उम्रकैद के योग्य हैं। इस समस्या से तभी कड़े ढ़ंग से निपटा जा सकता है।

मुख्य न्यायाधीश टीएस ठाकुर की अगुवाई वाली तीन सदस्यीय बेंच ने केंद्र सरकार को फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 में सुधार के लिए भी सुझाव दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सिंथेटिक दूध बेचने पर सजा को बढ़ाकर उम्रकैद किया जाए। ऐसा उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और उड़ीसा में पहले ही किया जा चुका है। 

वर्तमान में 2006 का कानून में सर्वाधिक सजा- उम्रकैद का प्रावधान तभी है, अगर असुरक्षित फूड से किसी की मौत हो जाए। न्यूनतम सजा 7 साल है। इसके अलावा बेंच ने राज्य और केंद्र सरकारों को 10 दिशानिर्देश भी जारी किए हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने दूध में मिलावट को लेकर दायर एक याचिका का निपटारा कर दिया। मामले की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने कड़े दिशा-निर्देश जारी किए है।

सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देश

- भारत और राज्य सरकारें फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 को लागू करने के लिए और भी कड़े व असरदार तरीके से उपयुक्त कदम उठाएं। 

- राज्य डेरी मालिकों, डेरी संचालकों और रिटेलर्स को सूचित करने के लिए उपयुक्त कदम उठाएंगे कि अगर दूध में पेस्टीसाइड्स, कास्टिक सोडा या अन्य कोई केमिकल्स पाए जाते हैं। तो उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी और इसमें शामिल सभी लोगों के खिलाफ भी।

- राज्य के फूड सेफ्टी अथॉरिटी को ऊंचे जोखिम वाले इलाकों (जहां छोटे फूड मैनुफैक्चरर/बिजनेस ऑपरेटर्स की अच्छी मौजूदगी है) और समय (जैसे त्यौहारों के नजदीक) की पहचान करना होगा। जब दूध और दूग्ध उत्पादों में मिलावट का जोखिम बढ़ जाता है। वातावरणीय वजहों के अलावा दूसरे फैक्टर्स को भी ध्यान में रखना है, और ऐसे इलाकों से बड़ी संख्या में फूड सैंपल्स को लिया जाना चाहिए।

- राज्य की फूड सेफ्टी अधिकारियों को लैब टेस्टिंग के लिए भी पर्याप्त मात्रा में व्यवस्थाएं सुनिश्चित करनी होंगी। सभी लैब्स को NABL की तरफ से प्रमाणित भी कराना होगा। इनमें पर्याप्त लोगों के साथ टेस्टिंग फैसिलिटी भी होंगी।

- जिला स्तर के अधिकारियों को भी दूध और इसके उत्पादों के सैम्पल्स इकट्ठे करने के लिए पर्याप्त कदम उठाने होंगे। इनमें स्पॉट टेस्टिंग और मोबाइल फूट टेस्टिंग वैन्स को लगाना होगा। जिनमें गुणवत्ता की जांच के लिए प्राइमरी टेस्टिंग किट्स रहेंगी।

- कैमिकल्स की मौजूदगी की जांच के सर्वे भी समय समय पर नियमित तौर पर किए जाएंगे।