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सुप्रीम कोर्ट ने दी परमीशन, खूब बजेगा अब DJ वाले बाबू का गाना और झूम के होगा नागिन डांस

शादी-व्याह बारातों डीजे पर जम कर बजेगा म्यूजिक और झूम-झूम कर होगा नागिन डांस। जी हां, सुप्रीम कोर्ट ने डीजे ऑपरेटर्स को बड़ी राहत दी है। डीजे ऑपरेटर्स को मिली इस राहत से शादियों में डांस करने वालों की बांछें भी खिल गयी हैं। हाल ही में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने शादियों और पार्टियों में डीजे पर पूरी तरह से बैन लगा दिया था। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले पर रोक लगा दी है।

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (20 नवंबर): शादी-व्याह बारातों डीजे पर जम कर बजेगा म्यूजिक और झूम-झूम कर होगा नागिन डांस। जी हां, सुप्रीम कोर्ट ने डीजे ऑपरेटर्स को बड़ी राहत दी है। डीजे ऑपरेटर्स को मिली इस राहत से शादियों में डांस करने वालों की बांछें भी खिल गयी हैं। दरअसल, हाल ही में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने शादियों और पार्टियों में डीजे के इस्तेमाल पर पूरी तरह से बैन लगा दिया था। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के इस फैसले पर रोक लगा दी है। आगामी शादी के सीजन से पहले कोर्ट ने अधिकारियों को कहा है कि वे कानून के अनुसार, डीजे बजाने की अनुमति दें।

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बीते 20 अगस्त को डीजे की आवाज को अप्रिय और नुकसानदायक बताते हुए इसपर पूरी तरह से रोक लगा दी थी। डीजे ऑपरेटर्स की ओर से कोर्ट में पेश हुए वकील दुष्यंत पराशर ने जस्टिस यूयू ललित और विनीत सरन की बेंच को बताया कि हाई कोर्ट के आदेश के चलते उत्तर प्रदेश में डीजे संचालक और कर्मचारी बेरोजगार हो रहे हैं। 13 सदस्यों के बुंदेलखंड साउंड ऐंड डीजे असोसिएशन की ओर से पेश हुए दुष्यंत पराशर ने कोर्ट में कहा कि ये लोग शादियों, बर्थडे पार्टियों और अन्य आयोजनों में डीजे बजाकर ही अपना घर चलाते थे लेकिन कोर्ट के आदेश के बाद यह सब बंद हो गया है।

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने डीजे बजाने की अनुमति न देने का आदेश दिया था। 14 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश पर रोक लगा दी थी। हालांकि, यह केवल एसएलपी दाखिल करने वालों तक ही सीमित था। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने अब कहा है, 'अब अगर कोई डीजे बजाने के लिए अनुमति मांगता है तो उसके आवेदन को संज्ञान में लिया जाए। अगर आवेदन कानूनी रूप से सही पाया जाए तो डीजे बजाने की अनुमति दी जा सकती है।'

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान वकील दुष्यंत पराशर ने यह भी कहा कि डीजे बजाने पर पूरी तरह से बैन संविधान के अनुच्छेद 16 (रोजगार का अधिकार) का भी उल्लंघन है। उन्होंने यह भी कहा कि हाई कोर्ट ने अपना आदेश किसी जनहित याचिका पर नहीं बल्कि दो लोगों द्वारा ध्वनि प्रदूषण की शिकायत पर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इस मामले में अगली सुनवाई 16 दिसंबर को होगी।

(Images Courtesy:Google)

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