यूपी सरकार रद्द नहीं करेगी लोकायुक्त की नियुक्ति: सुप्रीम कोर्ट

लखनऊ (20 जनवरी): सुप्रीम कोर्ट ने लोकायुक्त की नियुक्ति मामले में यूपी सरकार के रवैये पर गहरी नाराजगी जताते हुए कहा कि वह बगैर किसी बाध्यकारी कारण के पूर्व न्यायाधीश वीरेन्द्र सिंह की नियुक्ति रद्द नहीं करेगा। शीर्ष कोर्ट ने न्यायमूर्ति सिंह के बारे में उसे गुमराह करने पर राज्य सरकार के प्रति गहरी नाराजगी जताई।

खंडपीठ ने कहा कि राज्य सरकार ने गत माह हुई सुनवाई के दौरान पांच नाम दिए थे और दावा किया था कि न्यायमूर्ति सिंह के नाम पर तीन-सदस्यीय चयन समिति को कोई आपत्ति नहीं है, जबकि हकीकत यह थी कि चयन समिति के सदस्य इलाहाबाद हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने उनके नाम पर आपत्ति जताई थी। कोर्ट ने कहा कि उससे इन आपत्तियों के बारे में अवगत नहीं कराया गया और अंतत: उसने न्यायमूर्ति सिंह को लोकायुक्त नियुक्त कर दिया था।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट की एक पीठ ने राज्य में लोकायुक्त की नियुक्ति को लेकर उसके आदेश पर अमल नहीं करने से नाराजगी जताते हुए गत 16 दिसम्बर को खुद ही न्यायमूर्ति सिंह को लोकायुक्त नियुक्त कर दिया था। खंडपीठ ने ऐतिहासिक फैसला लेते हुए लोकायुक्त की नियुक्ति के लिए अनुच्छेद 142 में प्रदत्त अधिकारों का इस्तेमाल किया था। यह पहली बार था जब सुप्रीम कोर्ट ने किसी राज्य का लोकायुक्त नियुक्त किया था। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के राज्यपाल, मुख्यमंत्री और इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ को जमकर फटकार भी लगाई थी।

नियुक्ति के ठीक बाद न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने न्यायमूर्ति सिंह के नाम पर एतराज जताया था। उनका कहना था कि चयन समिति की बैठक में इस नाम पर सहमति नहीं बन पाई थी, उसके बावजूद राज्य सरकार ने न्यायमूर्ति सिंह का नाम सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रखा था। इस मामले में सच्चिदानंद उर्फ सच्चे गुप्ता ने एक जनहित याचिका दायर करके कहा था कि राज्य सरकार के प्रतिनिधियों ने शीर्ष कोर्ट को गुमराह किया था।