कर्मचारियों से ज्यादा काम लेना कोई गुनाह नहीं: सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली (22 मई): उच्च न्यायलय ने कर्मचारियों पर ज्यादा काम को लेकर के अपने फैसले में कहा है कि कर्मचारी से ज्यादा काम लेना तथा गलती होने पर उसका वेतन रोक देना आत्महत्या करने के लिए उकसाने का अपराध नहीं माना जा सकता। इतना ही नहीं कोर्ट ने अपने फैसले में ये भी कहा कि ऐसे मामले में वरिष्ठ अधिकारी को सजा नहीं दी जा सकती। अदालत ने कहा कि आपात स्थिति में जरूरत के हिसाब से ज्यादा काम करवाया जा सकता है तथा वेतन रोकने की सजा भी दी जा सकती है। इस कार्रवाई को वरिष्ठ अधिकारी के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप लगाने के लिए प्रयोग नहीं किया जा सकता।आपको बता दें कि जस्टिस अरुण कुमार मिश्रा और यूयू ललित की पीठ ने यह कहते हुए महाराष्ट्र के शिक्षा विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी वीके खांडके के खिलाफ आईपीसी की धारा 306 के तहत आत्महत्या के लिए उकसाने का केस समाप्त कर दिया। अभियुक्त वरिष्ठ अधिकारी थे, जिन्होंने कार्रवाई समाप्त करने के लिए बंबई हाईकोर्ट का रुख किया था। उनके खिलाफ शिकायत उस कनिष्ठ अधिकारी की पत्नी ने दायर की थी, जिन्होंने आत्महत्या कर ली थी। पत्नी ने आरोप लगाया था कि उसके पति मानसिक प्रताड़ना से गुजर रहे थे क्योंकि उसके वरिष्ठ अधिकारी उससे भारी काम ले रहे थे। लोग आए दिन काम के बोझ के चलते खुदकुशी कर लेते हैं उन्हें समझना होगा कि खुदखुशी किसी भी समस्या का समाधान नहीं है।