सुप्रीम कोर्ट ने समलैंगिकता मामला 5 जजों की बेंच को भेजा

नई दिल्‍ली (2 फरवरी): समलैंगिक संबंधो को अपराध घोषित करने वाली आईपीसी की धारा 377 का मामला सुप्रीम कोर्ट ने 5 जजों के बेंच को रेफर कर दिया। अब 5 जज के बेंच में मामले की सुनवाई होगी।

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट को तय करना है कि समलैंगिक संबंध अपराध है या नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने क्योरीटिव पेटिशन यानी भूल सुधार याचिका पर सुनवाई करते हुए इसे बड़ी बेंच के पास भेज दिया। इस इस मामले की सुनवाई 3 जज वाली बेंच कर रही थी, जिसने इसे आगे रेफर कर दिया है।

दिल्ली हाईकोर्ट ने करीब दो साल पहले समलैंगिक वयस्कों की सहमति से निजी तौर पर संबंध बनाने को अपराध की श्रेणी में नहीं रखने का फैसला किया था। लेकिन हाईकोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने बाद में पलट दिया था। दिल्ली हाई कोर्ट ने समलैंगिकों के बीच संबंध स्थापित करने को यह कहते हुए गैर-अपराधिक घोषित किया था कि यह असंवैधानिक है।

जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने 2013 में धारा 377 पर विचार कर उसे फिर से बहाल कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि समलैंगिकता या दो वयस्कों के बीच अप्राकृतिक यौन संबंध आईपीसी की धारा 377 के अंतर्गत एक अपराध है, जो आगे भी जारी रहेगा। सुप्रीम कोर्ट ने इस बाबत पुर्नविचार याचिका भी खारिज कर दी थी।