सुप्रीम कोर्ट ने प्रशांत भूषण से पूछे यह तीखे सवाल...

नई दिल्‍ली (13 जनवरी): गैर-सरकारी संगठन सेन्टर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटीगेशंस की कार्यप्रणाली सुप्रीम कोर्ट की समीक्षा के दायरे में आ गयी। न्यायालय ने इस संगठन के वकील प्रशांत भूषण से कई तीखे सवाल पूछे और कहा कि हो सकता है कि व्यावसायिक प्रतिद्वन्द्वी अपना हिसाब बराबर करने के लिये इसका इस्तेमाल कर रहे हों।

शीर्ष अदालत ने कहा कि कुछ सालों में सेन्टर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटीगेशंस ने 50 जनहित याचिकायें दायर की हैं परंतु उसका मानना है कि इस संगठन के पास इन सूचनाओं की पुष्टि करने का ऐसा कोई भरोसेमंद तंत्र नहीं है जो जनहित याचिकाएं दायर करने का आधार हो। प्रधान न्यायाधीश तीरथ सिंह ठाकुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने मुकेश अंबानी की रिलायंस जिओ इंफोकाम लि. को 4जी लाइसेंस दिये जाने को चुनौती देने वाली सेंटर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटीगेशंस की जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान ये टिप्पणियां कीं।

पीठ ने कहा कि हम समझते हैं कि आपके पास सूचनाओं की पड़ताल या पुष्टि करने का कोई तंत्र नहीं है जिससे पहली नजर में इन सूचनाओं में किसी प्रकार के कपट का पता चलता हो। आपके संगठन को व्यावसायिक प्रतिद्वन्द्वियों के हाथ का खिलौना नहीं बनना चाहिए और ऐसा भी नहीं लगना चाहिए कि आप दोनों की मिलीभगत है। जब हम आपकी याचिका पर विचार करते हैं, आपको छानबीन के लिये भरोसेमंद तंत्र स्थापित करना चाहिए। प्रबुद्ध लोगों को गहराई से विचार करके प्रमाणित करना चाहिए कि इस तरह का तंत्र भरोसा पैदा करता है। हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि सेंटर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटीगेशंस द्वारा दायर याचिका विशेष प्रक्रिया से गुजरी है और यह सही है।

भूषण ने इस बात से इंकार किया कि संगठन ने किसी एवज में जनहित याचिकाएं दायर की हैं और कहा कि जनहित याचिका दायर करने के बारे में निर्णय करने के लिये एक कार्यसमिति है जिसमें अनिल दीवान, शांति भूषण, कोलिन गोन्साल्विज जैसे वरिष्ठ अधिवक्ता शामिल हैं। पीठ ने कहा कि उसका मानना है कि अगर सूचनाओं की छानबीन के लिये कोई तंत्र है और यदि उसे अपने काम के लिये वित्तीय सहयोग मिलता है तो इसमें कोई परेशानी नहीं है। भूषण ने जब यह कहा कि इस संगठन में सूचनाओं तथा अन्य सामग्री पर गौर करने के लिये शोध प्रकोष्ठ है तो पीठ ने कहा कि इसमें एक जांच प्रकोष्ठ भी होना चाहिए जो अपनी रिपोर्ट दे ताकि विश्वसनीय प्रयास किया जा सके।