'प्रदर्शन के दौरान जानमाल को नुकसान पहुंचाने वाले नेताओं के खिलाफ भी चलना चाहिए आपराधिक मुकदमा'

नई दिल्ली(28 नवंबर): सुप्रीम कोर्ट ने कहा है प्रदर्शनों के दौरान जानमाल को नुकसान पहुंचाने वाले राजनीतिक दलों और संगठनों के  नेताओं के खिलाफ भी आपराधिक मुकदमा चलाया जाना चाहिए।

- कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है कि हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में ऐसे स्पेशल कोर्ट बनाये जाए। वो प्रदर्शनों के दौरान हिंसा करने वालो की जवाबदेही सुनिश्चित करे और हिंसा  पीड़ितो को उचित मुआवजा दिला सके।

- कोर्ट ने कहा राज्यों में हाईकोर्ट से परामर्श के मुताबिक एक या उससे ज्यादा डिस्ट्रिक्ट जज को ये जिम्मेदारी दी जा सकती। 

- सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हालांकि 2007 में अदालत पहले ही इस तरह के मामलों के लिए गाइडलाइन बना चुकी है, जिसमे प्रदशनों की वीडियोग्राफी करना भी शामिल है, लेकिन इसके बावजूद पीड़ितों को मुआवजा दिलाने के लिए अभी तक कोई मेकेनिज़्म नहीं बन पाया है।

- कोर्ट ने कहा कि जानमाल को नुकसान पहुंचाने वाले ये प्रदर्शन हर जगह हो रहे हैं, इन मामलों का निपटारा अकेले सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट के स्तर पर करना मुश्किल है। कोई ऐसा फोरम होना चाहिये जहां लोगों कानून से राहत पा सकें। 

- कोर्ट ने कहा कि हालांकि संविधान ने लोगों को एकत्रित होने और शांति पूर्ण प्रदर्शन का अधिकार दिया है, लेकिन सार्वजनिक संम्पति को नुकसान पहुंचाने और लोगों की ज़िंदगी से खेलने का हक़ किसी को नहीं है। 

- केंद्र सरकार की ओर से अटॉनी जनरल के के वेणुगोपाल ने भी सुप्रीम कोर्ट के सुझाव से सहमति जताई। एजी ने कहा कि सरकार प्रिवेंशन ऑफ डैमेज टू पब्लिक प्रॉपर्टी एक्ट  में संशोधन करेगी। बिल का ड्राफ्ट तैयार हो चुका है और आम लोगों और सम्बंधित पक्षों की राय लेने के लिए उसे गृह मंत्रालय की वेबसाइट पर डाल दिया जाएगा।