मुन्नाभाई 'MBBS' की तर्ज पर चल रहा था मेडिकल कॉलेज, SC ने दिए CBI जांच के आदेश

नई दिल्ली ( 17 दिसंबर ): सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश के एक निजी मेडिकल कॉलेज की जांच का आदेश दिया है। यह मामला मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के आरकेडीएफ मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर का है। सुप्रीम कोर्ट ने कॉलेज के होने वाले कामकाज में गड़बड़ी की जांच के बाद आरोप सही साबित होने पर आरकेडीएम मेडिकल कॉलेज की सीबीआई जांच के आदेश दिए हैं।

केंद्र सरकार और मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) ने जांच के दौरान पाया था कि 410 बिस्तरों वाले इस अस्पताल के बिस्तरों में नकली मरीज़ लेटे हुए थे। इस मामले में एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एएनएस नंदकर्नी केंद्र सरकार की तरफ से और वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह एमसीआई की तरफ से केस लड़ रहे हैं। दोनों का दावा है 2017-18 में छात्रों की भर्ती की अनुमति के लिए अस्पताल ने धोखीधड़ी की।

सुप्रीम कोर्ट ने मेडिकल कॉलेज के 2017-18 के सभी एडमिशन को रद्द कर दिया है और मध्य प्रदेश सरकार को आदेश दिया है कि छात्रों को किसी दूसरे मेडिकल कॉलेज में दाखिला दिया जाए। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने मेडिकल कॉलेज को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए पूछा है कि छात्रों को पैसा वापस और मुआवजा क्यों न दिया जाए।

सुप्रीम कोर्ट ने आरकेडीएफ मेडिकल कॉलेज में गड़बड़ी की रिपोर्ट के बाद ये फैसला किया था। एमसीआई की टीम ने 25 और 26 सितंबर को कॉलेज का निरीक्षण किया था, जिसमें उसे कई सारी खामियां मिलीं। सुप्रीम कोर्ट ने एमसीआई की जांच रिपोर्ट में पाया कि निरीक्षण के दिन ब्लड बैंक से खून की खपत जीरो यूनिट थी, जबकि रिकॉर्ड के मुताबिक अस्पताल में 410 बेड हैं। इसके साथ ही एमसीआई की टीम ने निरीक्षण के दौरान देखा कि कॉलेज फैकल्टी के कई सदस्य भी मौके पर मौजूद नहीं थे।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कमेटी में सीबीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी और AIIMS के दो दो डॉक्टर होंगे। कमेटी ये देखेगी की हॉस्पिटल में जो मरीज़ भर्ती हुए थे उनका मेडिकल रिकॉर्ड क्या है? वो ईलाज के लिए भोपाल के सर्वपल्ली राधाकृष्णन यूनिवर्सिटी मेडिकल कॉलेज में भर्ती क्यों और कब हुए थे। 

दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने ये जांच कमेटी केंद्र सरकार और मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया की शिकायत पर बनाई है। सुप्रीम कोर्ट ने 15 दिनों के भीतर कमेटी के मेंबर नियुक्त करने का समय दिया है और कमेटी को तीन महीनों में जांच पूरी कर रिपोर्ट देने को कहा है।

कमेटी कॉलेज का निरीक्षण करेगी और जो भी जानकारी की उनको जरूरत होगी उसको मुहैया कराया जाए। कॉलेज कमेटी के साथ पूरा सहयोग करेगा। अगर कमेटी को एमसीआई से किसी सहयोग की जरूरत होगी तो एमसीआई उनको पूरा सहयोग देगा।