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सुप्रीम कोर्ट का आदेश, दस लाख से ज्यादा आदिवासियों को छोड़ना होगा जंगल

सुप्रीम कोर्ट ने देश के लगभग 16 राज्यों में रह रहे 10 लाख से भी अधिक आदिवासियों को जंगल छोड़ने का फैसला सुनाया है। आदिवासियों और जंगल में रहने वाले अन्य लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए बने एक कानून का केंद्र सरकार बचाव नहीं कर सकी

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न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (22 फरवरी): सुप्रीम कोर्ट ने देश के लगभग 16 राज्यों में रह रहे 10 लाख से भी अधिक आदिवासियों को जंगल छोड़ने का फैसला सुनाया है। आदिवासियों और जंगल में रहने वाले अन्य लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए बने एक कानून का केंद्र सरकार बचाव नहीं कर सकी, जिसकी वजह से सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश दिया है याचिकाकर्ता ने यह भी मांग की थी कि वे सभी जिनके पारंपरिक वनभूमि पर दावे कानून के तहत खारिज हो जाते हैं, उन्हें राज्य सरकारों द्वारा निष्कासित कर दिया जाना चाहिए।

अदालत ने कहा, 'राज्य सरकारें यह सुनिश्चित करेंगी कि जहां दावे खारिज करने के आदेश पारित कर दिए गए हैं, वहां सुनवाई की अगली तारीख को या उससे पहले निष्कासन शुरू कर दिया जाएगा। अगर उनका निष्कासन शुरू नहीं होता है तो अदालत उस मामले को गंभीरता से लेगी।' मामले की अगली सुनवाई की तारीख 27 जुलाई है। इस तारीख तक राज्य सरकारों को अदालत के आदेश से आदिवासियों को उनकी जमीन से बेदखल करने का काम शुरू कर देना होगा।

जस्टिस अरुण मिश्रा, नवीन सिन्हा और इंदिरा बनर्जी की बेंच ने 16 राज्यों के मुख्य सचिवों को आदेश जारी कर कहा कि वे 12 जुलाई से पहले ऐफिडेविट जमा कराकर बताएंगे कि तय समय में जमीन खाली क्यों नहीं कराई गई। जंगलों और अभयारण्यों में अतिक्रमण की समस्या बेहद जटिल है। कई मामलों में कब्जाधारक अपने मालिकाना हक को साबित करने में असफल रहे हैं। केंद्र सरकार ने राज्यों से सुप्रीम कोर्ट के फैसले से प्रभावित होने वाले लोगों की जानकारी मांगी है। एक बार प्रभावित लोगों की कुल संख्या पता चलने के बाद केंद्र सरकार उनको लेकर विचार करेगी। जनजाति विकास मंत्रालय के सेक्रटरी दीपक खांडेकर ने कहा, हमें यह पता है कि अब तक जंगलों में 19 लाख पट्टों को बरकरार रखा गया है। इसके अलावा अन्य दावों की क्या स्थिति है, इस संबंध में हम राज्यों से पता करने का प्रयास कर रहे हैं।

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