दूसरे मजहब में शादी करने से महिला का धर्म बदल जाएगा: सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली(8 दिसंबर): सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को दूसरे मजहब में शादी करने वाली महिलाओं को लेकर एक बड़ा बयान दिया। एक पारसी महिला के मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट की कान्स्टीट्यूशन बेंच ने कहा- अगर कोई महिला दूसरे मजहब के शख्स से शादी करती है तो उसका धर्म नहीं बदल जाएगा। इस तरह का कोई कानून हमारे देश में नहीं है। चीफ जस्टिस की अगुआई वाली पांच जजों की कान्स्टीट्यूशन बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही है।

- बेंच में चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के अलावा जस्टिस एके. सीकरी, जस्टिस एएम. खानविलकर, जस्टिस डीवाय. चंद्रचूढ़ और जस्टिस अशोक भूषण शामिल हैं। 

- गुलरुख एम. गुप्ता नाम की महिला ने एक हिंदू शख्स से शादी की। वो अपने पैरेंट्स के अंतिम संस्कार में शामिल होना चाहती हैं। लेकिन, वलसाड पारसी बोर्ड इसकी इजाजत नहीं दे रहा था। मामले की सुनवाई 2010 में गुजरात हाईकोर्ट में हुई थी। तब हाईकोर्ट ने कहा था कि अगर पारसी महिला किसी हिंदू से शादी करती है तो उसका मजहब वही हो जाएगा जो उससे शादी करने वाले शख्स का है। 

- इस लिहाज से पारसी महिला अंतिम संस्कार के लिए पारसियों के ‘टॉवर ऑफ साइलेंस’ में जाने का हक खो देगी। महिला ने कहा कि अगर कोई पारसी पुरुष दूसरे मजहब की महिला से शादी करता है तो उसके पारसी हक नहीं छीने जाते, फिर पारसी महिला के साथ ये क्यों किया जाता है।

- सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर कहा- ऐसा कोई कानून नहीं जिसके तहत एक मजहब की महिला अगर दूसरे मजहब के शख्स से शादी करती है तो उसका पहला मजहब छूट जाएगा। 

- बेंच ने आगे कहा- हमारे यहां स्पेशल मैरिज एक्ट है। और ये इजाजत देता है कि दो अलग मजहबों के लोग शादी के बाद भी अपनी-अपनी धार्मिक पहचान कायम रख सकते हैं।