सुप्रीम कोर्ट का केंद्र को आदेश, नौकरों का रेजिस्ट्रेशन नहीं करने वाले राज्यों को न करें फंड का आवंटन

नई दिल्ली ( 31 मई ): अब उन राज्यों को केंद्र का फंड नहीं मिलेगा जिन्होंने अभी तक घरेलू नौकरों का रेजिस्ट्रेशन नहीं किया है। सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती दिखाते हुए केंद्र सरकार से कहा है कि वो उन राज्यों को फंड का आवंटन न करे, जिन्होंने अभी तक घरेलू नौकरों का रजिस्ट्रेशन नहीं किया है। देश में करीब 48 लाख घरेलु नौकर है, जिनमें एक बड़ी तादाद करीब 30 लाख की महिलाओं की है, लेकिन ये असंगठित क्ष्रेत्र अभी तक सामाजिक सुरक्षा कवर के दायरे में ना आ पाने के चलते सामाजिक सुविधाओं से वंचित है।कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शाशित प्रदेशों ने सोशल सिक्योरिटी एक्ट 2008 के तहत घरेलू नौकरों के रजिस्ट्रेशन को लेकर उठाये गए कदमों के बारे में जानकारी मांगी है। साथ ही कहा है कि  ये राज्यों के चीफ सेक्रेटरी और प्रशासनिक विभागों के मुख्य सेक्रेटरी की जिम्मेदारी बनती है कि वो कोर्ट के दिये आदेश के मुताबिक स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करें।पिछले साल मार्च में कोर्ट ने केंद्र सरकार को एक्ट के मुताबिक, तीन महीने के अंदर नेशनल सोशल सिक्योरिटी बोर्ड गठित करने का आदेश दिया था,  मई 2017 में सरकार ने बोर्ड भी बना दिया, अगस्त 2017 में कोर्ट ने बोर्ड से वर्कर्स के रेजिस्ट्रेशन और उन्हें समाजिक लाभ प्रदान करने को लेकर उठाये गए कदमों के बारे में रिपोर्ट तलब की थी,पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर कोर्ट ने दिल्ली सरकार को  घरेलू नौकरों का सोशल सिक्युरिटी एक्ट 2008 के तहत रेजिस्ट्रेशन कराने का आदेश दिया था।इसी साल फरवरी में कोर्ट ने केंद्रीय श्रम सचिव को फरवरी 2018 से रेजिस्ट्रेशन प्रकिया को सुनिश्चित करने का आदेश दिया था, साथ ही कहा था कि इन कामगारों को पहचान पत्र और सामाजिक सुविधाओं जा फायदा दिया जाए। कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पक्षकार बनाते हुए केंद्रीय श्रम सचिव से 15 मई तक रिपोर्ट दाखिल करने को कहा था।बहरहाल अब सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को रजिस्ट्रेशन न करने वाले राज्यों को फंड का आंवटन न करने का निर्देश दिया है,अगली सुनवाई 8 अगस्त को होगी।