सुप्रीम कोर्ट का एससी-एसटी ऐक्ट में संशोधन संबंधी फैसले पर रोक लगाने से इंकार

नई दिल्ली ( 4 अप्रैल ): सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को अनुसूचित जाति-जनजाति कानून ( एससी-एसटी ऐक्ट ) संबंधी अपने फैसले पर रोक लगाने का केंद्र सरकार के अनुरोध को खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह इन समुदायों के अधिकारों के संरक्षण और उनके ऊपर अत्याचार करने के दोषी व्यक्तियों को दंडित करने का सौ फीसदी हिमायती है। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में गिरफ्तारी को बहुत आसान नहीं बनाया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट  ने केंद्र की यह दलील मानने से भी इंकार कर दिया कि उसके 20 मार्च के आदेश के चलते कई राज्यों में हिंसा भड़की और कई लोगों की जान चली गई।केंद्र सरकार ने कोर्ट से कहा कि 20 मार्च को जारी वह आदेश विधायिका के पारित कानून के विपरीत है जिसमें अनुसूचित जाति-जनजाति के लोगों के खिलाफ अत्याचार होने के मामले में आरोपी की तुरंत गिरफ्तारी से बचाव के प्रावधान वाले गाइडलाइंस जारी किए गए हैं। इसलिए आदेश पर रोक लगाया जाना चाहिए और सुनवाई के लिए मामला वृहद पीठ को सौंपा जाना चाहिए।हालांकि, जस्टिस आदर्श कुमार गोयल और जस्टिस उदय यू ललित की बेंच ने आदेश पर रोक लगाने से इंकार किया और कहा कि निर्णय करते समय अदालत ने किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी पहलुओं और फैसलों पर विचार किया था।सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि टाडा और मकोका जैसे कानूनों में अग्रिम जमानत का प्रावधान नहीं है। इन दोनों मामलों में अपराध की प्रकृति ज्यादा गंभीर मानी जाती है। अगर अपराध गंभीर होगा तो अदालत का आदेश अदालत का आदेश गिरफ्तारी की राह में आड़े नहीं आएगा।दो जजों की बेंच ने कहा कि एससी/एसटी ऐक्ट के तहत अपराध के मामलों में एफआईआर दर्ज होने पर रोक नहीं लगाई है, बल्कि ये कहा गया है कि एफआईआर दर्ज होने से पहले घटना की पुष्टि कराने के बारे में व्यवस्था दी है, ताकि निर्दोषों को सजा नहीं मिले।