'सुपरटेक का कई सौ करोड़ का टाउनशिप प्रोजेक्ट रद्द'

नई दिल्ली (24 मई):  देश के नामी -गिरामी बिल्डर सुपरटेक का कई सौ करोड़ वाला यमुना एक्सप्रेस वे पर टाउनशिप प्रोजेक्ट रद्द हो गया है। बिल्डर पर उत्तर प्रदेश के शासन के फर्जी पत्र से जमीन हथियाने का कथित आरोप है। इस प्रोजेक्ट पर यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के दो सीईओ के आपत्ति दर्ज कराए जाने के बाद इस प्रॉजेक्ट पर रोक लगायी गयी है । दोनों अधिकारियों का कहना है कि बिल्डर ने एक फर्जी पत्र के माध्यम से प्लान रिवाइज करवाया। दोनों ही की तरफ से सुपरटेक के खिलाफ एक एफआईआर दर्ज कराने की भी सिफारिश की गयी थी।

मिली जानकारी के मुताबिक 2011 में सुपरटेक के ने एक पत्र देकर ग्राउंड कवरेज क्षेत्र बढ़ाने की अनुमति मांगी थी। इसके बाद बिल्डर ने तकरीबन 730 प्लॉट और विला 343 करोड़ रुपयों में विभिन्न लोगों को बेच दिये। 2015 में जब सुपरटेक की तरफ से प्रॉजेक्ट के समाप्त होने का सर्टिफिकेट लेने की प्रक्रिया शुरू हुई तो यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के सीईओ संतोष यादव और अनिल गर्ग ने यह मुद्दा उठाया कि प्लान के लिए जमा किए दस्तावेज फर्जी हैं।

सुपरटेक के आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार इसके प्रॉजेक्ट सुपरटेक अपकंट्री के सभी 28 टावर, प्रत्येर टावर में 120 घर, 948 विला और प्लॉट बिक चुके हैं। इनके खरीदार पोजिशन का इंतजार कर रहे हैं। सुपरटेक को 100 एकड़ जमीन टीएस-1 सेक्टर 17-ए के पास जून 14, 2010 में आवंटित की गई थी। प्लॉट अगस्त में रजिस्टर्ड हुआ।  यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के चेयरपर्सन और सीईओ मोहिंदर सिंह ने बिल्डर को टाउनशिप बसाने के लिए 25 जनवरी 2011 को बिल्डिंग बायलॉज ऑफ सितंबर 2009 के तहत अनुमति दी थी।