हर छात्र को मिलेंगे 10-10 लाख रुपये!

नई दिल्ली(24 नवंबर): सुप्रीम कोर्ट की रोक के बावजूद हाईकोर्ट से एडमीशन की इजाजत लेने का आदेश लखनऊ के जीसीआरजी मेमोरियल ट्रस्ट मेडिकल कालेज को मंहगा पड़ा है। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को न सिर्फ एमबीबीएस कोर्स में 150 छात्रों का दाखिला रद कर दिया है बल्कि छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने पर कालेज को आदेश दिया है कि वह छात्रों को दस दस लाख रुपये और फीस की रकम वापस करे। 

- इसके अलावा कोर्ट ने मेडिकल कालेज पर 25 लाख का जुर्माना भी ठोका है। 

- सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक अनुशासन की अनदेखी कर आदेश पारित करने पर हाईकोर्ट को आड़े हाथों लेते हुए तीखी टिप्पणियां भी कीं। 

- एमसीआइ ने कालेज की खामियों के चलते शैक्षणिक सत्र चलाने की अनुमति नहीं दी थी। लेकिन कालेज ने हाईकोर्ट से मंजूरी ले ली थी।

- मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ का यह आदेश न्यायिक अनुशासन की अनदेखी कर जल्दबाजी में आदेश देने वाली अदालतों और मन माफिक आदेश पाने के लिए अलग अलग अदालतों का चक्कर लगाने वाले संस्थानों के लिए एक नसीहत है। सुप्रीम कोर्ट से स्पष्ट तौर पर 2017-18 के शैक्षणिक सत्र की अनुमति देने पर रोक के बावजूद हाईकोर्ट ने मेडिकल कालेज को 2017-18 के शैक्षणिक सत्र के लिए 150 छात्रों को एमबीबीएस में प्रवेश देने की इजाजत दे दी थी।

-  कोर्ट ने हाईकोर्ट के रवैये पर ऐतराज जताते हुए कहा कि उसने ऐसा आदेश पारित करने से पहले मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया और केन्द्र सरकार को पक्ष रखने की भी इजाजत नहीं दी। 

- पीठ ने कहा कि छात्रों के प्रवेश की अनुमति देने वाला हाईकोर्ट का आदेश अनुचित, गलत और बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। हाईकोर्ट ने न्यायिक शुचिता और अनुशासन का ख्याल नहीं किया।

- सुप्रीम कोर्ट ने सभी छात्रों का प्रवेश रद करते हुए कहा कि जिन लोगों ने युवा छात्रों को गुमराह कर उन्हें प्रवेश दिया और उनसे फीस वसूली वे ऐसे ही नहीं छोड़े जा सकते। कोर्ट ने कालेज को आदेश दिया कि वह सभी छात्रों को वसूली गई फीस के अलावा 10-10 लाख रुपये दे। इसके अलावा 25 लाख रुपये जुर्माने के तौर पर आठ सप्ताह के भीतर सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री में जमा कराए।