'मस्तीज़ादे' में लगे 381 कट, प्रोमो पर कोर्ट ने सेंसर बोर्ड से रिपोर्ट मांगी

चंडीगढ़  (28 जनवरी), बालीवुड फिल्म ‘क्या सुपरकूल हैं हम’’ को ‘ए’’ सर्टिफिकेट देते हुए 139 कट के बाद रिलीज किया गया है जबकि ‘मस्तीजादे’ को ‘ए’ सर्टिफिकेट और 381 कट के बाद रिलीज की अनुमति दी गयी। यह जानकारी असिस्टेंट सालिसिटर जनरल चेतन मित्तल ने बुधवार को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट को दी।

बता दें कि एक एनजीओ रक्षा ज्योति फाउंडेशन ने इन दोनों फिल्मों के ख़िलाफ़ याचिका दायर की है। याचिका के मुताबिक इन दोनों फिल्मों के ज़रिए अश्लीलता परोसी जा रही है, अत: इन पर प्रतिबंध लगना चाहिए।

किस फिल्म में कितने कट्स ?

केंद्र और सेंसर बोर्ड की ओर से पैरवी कर रहे चेतन मित्तल ने अदालत को बताया कि 'क्या कूल हैं हम 3' के निर्माताओं की ओर से खुद ही 107 कट्स की पेशकश की गई थी लेकिन सेंसर बोर्ड ने 32 और कट्स के निर्देश के साथ फिल्म को ए सर्टिफिकेट दिया। वहीं 'मस्तीज़ादे' के निर्माताओं की ओर से 349 कट्स की पेशकश की गई थी। सेंसर बोर्ड ने फिल्म में 32 और कट्स के निर्देश के साथ ए सर्टिफिकेट दिया। 'क्या कूल हैं हम 3' 22 जनवरी को रिलीज हो चुकी है। वहीं 'मस्तीज़ादे' 29 जनवरी को रिलीज़ हो रही है।   

चेतन मित्तल ने हाईकोर्ट को बताया कि यू ट्यूब या इंटरनेट पर फिल्मों का जो कंटेट या प्रोमोज़ दिखाए जा रहे हैं उनका सेंसर बोर्ड परीक्षण नहीं करता इसलिए उन पर उसका कोई नियंत्रण नहीं है। साथ ही कहा कि फिल्म के निर्माताओं से ये लिखित में लिया जाता है कि सेंसर बोर्ड ने जो कट्स लगाए हैं वो कोई भी सीन प्रोमो या ट्रेलर में मौजूद नहीं रहेगा।

कोर्ट को ये भी बताया गया कि एक रिपोर्ट गुरुवार को अदालत में दी जाएगी जिसमें ये बताया जाएगा कि क्या प्रोमो में ऐसा कोई दृश्य मौजूद है जिसे सेंसर बोर्ड ने फिल्म से हटाने का निर्देश दिया था।

कोर्ट को बताया गया कि जब सेंसर बोर्ड किसी फिल्म के कंटेट को जांचता है तो ये देखता है कि कोई दृश्य या संवाद पूर्व निर्धारित दिशानिर्देशों का उल्लंघन तो नहीं करता। इनमें द्विअर्थी संवाद, अश्लील दृश्य, अवमानना वाले दृश्य या महिलाओं की गरिमा के खिलाफ दृश्य या संवाद शामिल हैं। इन सब को हटा दिया जाता है।

प्रोमो पर कोर्ट ने रिपोर्ट मांगी

हाईकोर्ट ने सुनवाई गुरुवार तक स्थगित कर दी। साथ ही केंद्र को ऐसे दिशानिर्देश प्रस्तुत करने को कहा जो फिल्म की रिलीज़ से पहले अनुमति या उसके कंटेट से जुड़े होते हैं। कोर्ट ने केंद्र से याचिका के इस आरोप पर भी जवाब मांगा कि इन दोनों फिल्मों के प्रोमो में द्विअर्थी संवादों और अश्लीलता की भरमार है। साथ ही इनके प्रसारण से परिवारों को टीवी साथ देखने में शर्मिंदगी का सामना करना पड़ता है।

क्या कहना है 'मस्तीज़ादे' के निर्देशक का ?

एक तरफ कोर्ट का कड़ा रुख है। वहीं मस्तीज़ादे के निर्देशक मिलाप ज़ावेरी का कहना है कि फिल्म के ट्रेलर में जो भी दृश्य दिखाए गए हैं, वो सब फिल्म में मौजूद रहेंगे। मिलाप ने कहा- "हमारी फिल्म 'मस्तीज़ादे' 100 परसेंट पैसा वसूल कॉमेडी है। हम फिल्म दर्शकों को धोखा देने के लिए नहीं बैठे हैं। पिछले एक साल से वो सेंसर बोर्ड से हमारे संघर्ष में हमारा साथ दे रहे हैं। उन्होंने हमारे प्रोमो को पसंद किया है। फिल्म के गानों को हिट किया है। सोशल मीडिया पर हमें ट्रेंड करने में मदद दी है। फिल्म से जुडे हर इवेंट को उन्होंने सफल बनाया है। हमारे पर भरोसा रखने वाले प्रशंसकों से हमने नॉटी, सेक्सी और मैड कॉमेडी देने का वादा किया है, यहीं शुक्रवार को फिल्म रिलीज़ होने पर उन्हें मिलेगा। असली मस्ती, असली कॉमेडी। हम उन्हें शिकायत का कोई मौका नहीं देंगे।"