होनहार सुलेखा को चाहिए एक अदद धनुष...

अरुण कुमार तिवारी, धनबाद (10 जून): देश की एक बेटी बेबस है, वो देश का नाम रोशन करना चाहती है। लेकिन गुरबत की जंजीरें उसके हाथों को बांध लेती हैं। उसका निशाना अचूक है, लेकिन निशाने के लिए एक धनुष की दरकार है। ओलंपिक में गोल्ड जीतने का सपना दम तोड़ रहा है, क्योंकि मेरे देश का हुनर गरीबी में जी रहा है।

सुलेखा रोजाना कई नेशनल और स्टेट लेवल के सर्टिफिकेट और पुरस्कार जीत चुकी है।  लेकिन आस धनुष की उम्मीद पर आकर खत्म हो जाती है। घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है। ऐसे में महंगा धऩुष खरीदना मुश्किल है। खुद सुलेखा को घर से दूर रहकर पांच हजार की नौकरी करनी पड़ रही है। 

झारखंड की तीरंदाजी फेडरेशन को सुलेखा पर गर्व तो है। लेकिन खुद फेडरेशन की आर्थिक हालत इतनी खराब है कि मदद कर पाने में असमर्थ है। 

देखिए न्यूज़24 की रिपोर्ट...

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