भारत के 'ब्रह्मास्त्र' से घबराया चीन, पाकिस्तान की उड़ी नींद

नई दिल्ली (8 अगस्त): दुनिया के सबसे तेज हथियारों में शामिल सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल 'ब्रह्मोस' एक बार फिर दिखाएगी अपनी ताकत। ब्रह्मोस का थार के रेगिस्तान में एक बार फिर किया जाएगा परीक्षण। जमीन से जमीन पर हमले के परीक्षणों में खरी उतर चुकी इस मिसाइल को आनेवाले कुछ दिन में सुखोई फाइटर जेट से दागा जाएगा। इसके निर्माताओं ने कहा है कि इस मिसाइल से भारतीय वायुसेना की ताकत कई गुना बढ़ जाएगी।

ब्रह्मोस एयरोस्पेस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) और प्रबंध निदेशक सुधीर मिश्र ने कहा कि हम इस महीने 24 अगस्त तक एक ड्रॉप परीक्षण करने की उम्मीद कर रहे हैं। ड्रॉप परीक्षण से विमान की मिसाइल छोड़ने वाली यंत्रावली का परीक्षण होगा। यह परीक्षण राजस्थान के पोखरण फायरिंग रेंज में किया जाएगा। इसका अंतिम परीक्षण बंगाल की खाड़ी में नौसेना की सेवा से हटा दिए गए एक पोत पर निशाना साधकर किया जाएगा।

मिश्र ने कहा कि ड्रॉप परीक्षण के बाद हमलोग यह देखेंगे कि क्या इसके सॉफ्टवेयर और अन्य प्रणाली में कुछ और संशोधन की जरूरत है?  एक सुखोई एसयू-30 विमान को ब्रह्मोस मिसाइल के हवाई संस्करण से लैस किया गया है। पहली बार उस विमान ने गत 25 जून का नासिक में उड़ान भरी थी। तब से यह मिसाइल बगैर किसी परेशानी के लगभग 10 घंटे की उड़ान विमान के साथ भर चुकी है।

सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल- ब्रह्मोस वजन-3,000 KG(सेना और नौसेना), 2,500 KG(वायुसेना) गति-2.8 मैक (3,400 किमी) से 3.0 तक (3,700 किमी)  लंबाई-8.4 मीटर व्यास-0.6 मीटर वारहेड-250 KG पारम्परिक, 300 KG न्यूक्लियर वॉर-हेड उड़ान सीमा-290-300 किमी तक उड़ान ऊंचाई-अधिक 14 किमी ((46,000 फीट)

ब्रह्मोस मिसाइल की खासियत - यह हवा में ही मार्ग बदल सकती है और चलते फिरते लक्ष्य को भी भेद सकती है। - इसको वर्टिकल या सीधे कैसे भी प्रक्षेपक से दागा जा सकता है। - यह मिसाइल तकनीक थलसेना, जलसेना और वायुसेना तीनों के काम आ सकती है। - यह 10 मीटर की ऊँचाई पर उड़ान भर सकती है और रडार की पकड में नहीं आती। - रडार ही नहीं किसी भी अन्य मिसाइल पहचान प्रणाली को धोखा देने में सक्षम है। इसको मार गिराना लगभग असम्भव है। - ब्रह्मोस अमरीका की टॉम हॉक से लगभग दुगनी अधिक तेजी से वार कर सकती है, इसकी प्रहार क्षमता भी टॉम हॉक से अधिक है। - आम मिसाइलों के विपरित यह मिसाइल हवा को खींच कर रेमजेट तकनीक से ऊर्जा प्राप्त करती है। - यह मिसाइल 1200 यूनिट ऊर्जा पैदा कर अपने लक्ष्य को तहस नहस कर सकती है। - ब्रह्मोस मिसाइल दो इंधन से चलती है प्रथम चरण में solid propellant booster और दूसरे चरण में liquid-fueled ramjet होता है। - पहले चरण में Solid propellant booster इंजन को सुपरसोनिक गति प्रदान करता है और फिर अलग हो जाता है  - जबकि दूसरे चरण का liquid-fueled ramje मिसाइल को क्रूज चरण में 3 मैक तक ले जाता है। - ब्रह्मोस मिसाइल स्टील्थ (Stealth) प्रौद्योगिकी के साथ निर्देशन प्रणाली से युक्त है, मिसाइल ‘दागो और भूल जाओ’ सिद्धांत पर कार्य करती है। - ब्रह्मोस मिसाइल की क्रूजिंग एल्टीट्यूड 15 किमी. तक हो सकता है और इसका टर्मिनल एल्टीट्यूड न्यूनतम 10 मीटर है।

2024 तक आएगा ब्रह्मोस का हाइपरसोनिक वर्जन 'ब्रह्मोस-II' - ब्रह्मोस के सुपरसोनिक वर्जन के अलावा ब्रह्मोस हाइपरसोनिक वर्जन की भी तैयारी हो रही है। - ब्रह्मोस-II की यह मिसाइल हाइपरसोनिक गति से उड़ान भरेगी, इसकी गति ध्वनि से 7 गुना अधिक होगी।  - हाइपरसोनिक गति पर ब्रह्मोस-II 8,575 किमी प्रति घंटा और 2.3 किमी प्रति सेकेंड की रफ्तार से उड़ेगी। - ध्वनि की गति से पांच से दस गुना के बीच की रफ्तार को हाइपर सोनिक कहा जाता है। - ध्वनि से सात गुना अधिक गति होने के कारण यह अपने लक्ष्य पर सामान्य वारहेड की अपेक्षा तीस गुना अधिक मारक क्षमता से मार कर सकेगी। - ब्रह्मोस-II का पहला टेस्ट 2017 में होने की उम्मीद है, 2024 तक तीनों सेनाओं में शामिल किया जा सकता है।

ब्रह्मोस नाम कैसे पड़ा... - 12 फरवरी, 1998 को मॉस्को में भारत और रूस के बीच एक समझौता हुआ था। - भारत के शीर्ष रक्षा वैज्ञानिक और पूर्व राष्ट्रपति स्व.एपीजे अब्दुल कलाम और रूस के उपरक्षामंत्री मिखाइलोव के बीच हुआ था समझौता। - समझौते के तहत भारत के DRDO और रूस की NPO के मध्य एक संयुक्त उपक्रम ‘ब्रह्मोस एयरोस्पेस’ की स्थापना हुई। - इस साझेदारी का उद्देश्य विश्व की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस का डिजाइन, विकास, विनिर्माण और बिक्री करना था। - ब्रह्मोस मिसाइल का नामकरण भारत की ब्रह्मपुत्र नदी 'ब्रह्म' और रूस की मोस्कोवा नदी 'मोस' के नाम पर किया गया है। - ब्रह्मोस मिसाइल का पहला सफल परीक्षण 12 जून, 2001 को अंतरिम परीक्षण रेंज, चांदीपुर, ओडिशा से किया गया था। - साल 2005 में भारतीय नौसेना में ब्रह्मोसके पहले संस्करण को शामिल किया गया। - भारतीय सेना में भी ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल की तीन रेजीमेंटों को शामिल किया गया है।