Success Story: भारतीय मूल के विनोद चौधरी ऐसे बने नेपाल के सबसे बड़े रईस

नई दिल्ली (21 अप्रैल): नेपाल के पहले अरबपति उद्योगपति विनोद चौधरी इस समय सुर्खियों में छाए हैं। उन्होंने हाल ही में अपनी आत्मकथा ‘मेक इट बिग’ प्रकाशित की है। इसमें उन्होंने अपनी सफलता का राज़ ऊंची आकांक्षा, संगठन निर्माण, बाजार जागरूकता और रुझान के बारे में पुख्ता जानकारी रखने को बताया है। 

रिपोर्ट के मुताबिक, पेंग्विन रैंडम हाउस की तरफ से यह आत्मकथा प्रकाशित की गई है। जिसमें भारतीय मूल के 61 वर्षीय नेपाली कारोबारी चौधरी ने फैसले करने के लिए अपने अनुभव पर भरोसा करने की बात कही है। चौधरी समूह के चेयरमैन वाई वाई ब्रैंड का इंस्टैंट नूडल बनाने के लिए प्रसिद्ध हैं। जिसका विस्तार भारत में भी है। समूह में 122 कंपनियां हैं, जो बैंकिंग, बीमा, वित्त, होटल, खाद्य, रीयल एस्टेट, खुदरा और इलेक्ट्रॉनिक्स के कारोबार से जुड़ी हैं।

चौधरी ने कहा, "वाई वाई की कहानी 35 साल पहले शुरु हुई। जबकि एक मित्र ने महसूस किया कि बैंकाक-काठमांडू उड़ानों के जरिए बाजार में भारी मात्रा में नूडल्स आता है। जहां भारी मात्रा में नेस्ले इंडिया लिमिटेड की मैगी का आयात होता है।"

उन्होंने बाजार में कदम रखा और एक ऐसी कंपनी बनी जिसने भारत में अरबों पैकेट बेचे। अब 35 देशों में अपना कारोबार करती है। उन्होंने बताया कि कैसे उन्होंने चुनौतियों से मुकाबला करने के लिए चार तरह के उपाय अपनाए। उन्होंने सस्ते ब्रैंड पेश किए। इसके अलावा रचनात्मक विज्ञापन बनाए, रचनात्मक कार्यक्रम बनाए और संगठनात्मक ढांचे में बदलाव किया। जिससे कि ज्यादा स्थानीय आबादी को शामिल किया जा सके। 250 करोड़ रुपए के सालाना कारोबार वाली कंपनी बनाई जा सके।

अपने आत्मकथा में चौधरी ने अपने परिवार की जड़ों के बारे में भी जिक्र किया है। विशेष तौर पर अपने दादा की जो राजस्थान के शेखावटी में पैदा हुए थे। और 20 साल से कम उम्र में नेपाल पहुंचे। चौधरी के पिता ने नेपाल में पहला डिपार्टमेंट स्टोर स्थापित किया था। 18 साल की कम उम्र में वह कारोबार से जुड़े। बाद में वह फोर्ब्स की अरबपतियों की सूची में भी शामिल हुए।