समुद्र की गहराई में जाने वाला वाटरक्राफ्ट बनाएगा भारत


नई दिल्ली ( 5 अगस्त ):
अंतरिक्ष में कामयाबी की बुलंदिया को झूने के बाद अब भारतीय वैज्ञानिक समुद्र की गहराइयों को नापने की तैयारी कर रहे हैं। में जुट गए हैं। वैज्ञानिक एक ऐसा वीइकल बना रहे हैं, जिसके जरिए इंसान गहरे समुद्र में जा सके। 

ईएसएसओ-नैशनल इंस्टिट्यूट ऑफ ओशन टेक्नॉलजी (NIOT) से जुड़े वैज्ञानिकों की एक टीम गहरे पानी में जा सकने वाले देश के पहले इंसानी वीइकल के शुरुआती डिजाइन के साथ तैयार है। इसमें तीन लोग सवार हो सकते हैं। इसके आने वाले पांच साल में तैयार होने की उम्मीद है। इसे बनाने में करीब 500 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसकी मदद से वैज्ञानिक गहरे समुद्र में छह किमी नीचे तक जा सकेंगे। इसके जरिए दुर्लभ धातुओं और जीव-जंतुओं के बारे में पता लगाया जा सकेगा। 

वीइकल के तैयार होते ही भारत ऐसे चुनिंदा देशों में शुमार हो जाएगा, जो पानी के अंदर इंसानों को ऐसे यान के जरिए भेजने में सक्षम हों। वर्तमान में चीन, अमेरिका, रूस, फ्रांस और जापान जैसे देशों ने गहरे समुद्र में इंसानी मिशनों को अंजाम दिया है। NIOT के डायरेक्टर सतीश शेनोई ने कहा कि उनके संगठन ने एक प्रस्ताव केंद्र सरकार को दिया है और मंजूरी का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने कहा, 'एक बार मंजूरी मिलते ही वैज्ञानिकों की एक टीम डिजाइन का मूल्यांकन करके उसे बेहतर बनाएगी। इस टीम में इसरो, डीआरडीओ और आईआईटी के एक्सपर्ट शामिल होंगे।'

गौरतलब है कि हाल ही में इसरो के वैज्ञानिकों ने सबसे भारी रॉकेट GSLV-Mk3 लॉन्च किया था, जिसमें इंसान को अंतरिक्ष में ले जाने की क्षमता है।