'धरती को तबाही से बचा रहे हैं भारत और चीन'

नई दिल्ली ( 15 नवंबर ): अमेरिका ने जलवायु परिवर्तन को कम करने की जिम्मेदारी से अपना पल्ला झाड़ चुका है। लेकिन अब उस जिम्मेदारी को भारत और चीन मिलकर पूरा करने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। भारत और चीन की प्रभावशाली जलवायु नीतियों के कारण ग्लोबल वॉर्मिंग का खतरा उतना गंभीर नहीं होगा, जितना पहले अनुमान लगाया गया था। 

बुधवार को एक अध्ययन में कहा गया कि अमेरिका की निष्क्रियता की भरपाई ये दोनों देश करेंगे। हालांकि इसका मतलब यह भी नहीं है कि स्थितियां काफी सुधर जाएंगी। अध्ययन के मुताबिक औसत वैश्विक तापमान लगातार बढ़ रहा है जबकि 2015 पैरिस डील का मकसद ग्लोबल वॉर्मिंग को 2 डिग्री सेल्सियस नीचे लाना है। 

तीन स्वतंत्र यूरोपियन रिसर्च ग्रुप्स द्वारा तैयार कार्बन ऐक्शन ट्रैकर (CAT) रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा नीतियों के तहत दुनिया साल 2100 तक 3.4 डिग्री सेल्सियस (6.1 फ़ारनहाइट) ज्यादा गर्म हो जाएगी। जबकि एक साल पहले इसके 3.6 डिग्री सेल्सियस (6.5 फ़ारनहाइट) का अनुमान लगाया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक, 'CAT ने 2009 से निगरानी रखना शुरू किया तब से यह पहली बार है जब राष्ट्रीय स्तर पर नीतियों के कारण सदी के आखिर में तापमान में बढ़ोत्तरी के अनुमान में कमी आई है।'