यहां श्मशान में दो दर्जन लड़कों ने डाला डेरा

श्रीगंगानगर (13 जुलाई): श्रीगंगानगर जिले का जैतसर कस्बा। करीब दो हजार घरों की आबादी। बाहर से आकर रहने वाले कम ही होते थे लेकिन अचानक यहां युवाओं की चहल-पहल बढ़ गई है। राजस्थान की अलग-अलग जगहों से करीब 200 युवक-युवतियां यहां सेना भर्ती की तैयारी के लिए आए हुए हैं। एक कोच हैं कुलवंत सिंह, जो यहां निशुल्क तैयारी करवाते हैं।

गांव में कमरे किराए देने का रिवाज कभी नहीं रहा। अचानक से युवा आने लगे तो बड़ी समस्या खड़ी हो गई। यहां आई 25 युवतियों को जैसे-तैसे कमरे मिल गए, लेकिन लड़कों को कोई रखने को तैयार नहीं। फिर एक सहारा बना बिश्नोई धर्मशाला। लेकिन यहां भी जगह की सीमा थी। जो बच गए, उन्हें किसी ने मजाक में कहा कि श्मशान खाली पड़ा है, कमरे भी हैं, वहां रह लो।

लड़कों को बात जम गई। श्मशान घाट स्वर्ग आश्रम से जुड़े बलदेव किशन के पास पहुंचे। श्मशान में रहने की इजाजत मांगी तो वे भी चौंक गए। फिर कमेटी में बात की तो बात मान ली गई। अब 20 से ज्यादा लड़के यहीं रहकर तैयारी कर रहे हैं।

यहां आने के बाद यह युवक हनुमान चालीसा का पाठ सभी सामूहिक रूप से करके सोते हैं। रात को जब कभी आंधी-बारिश आ जाती है तो जरूर डर लगता है। कोच कुलवंत सिंह कहते हैं कि इस उम्र के बच्चे श्मशान के नाम से ही डर जाते हैं। ऐसे में इनका यहां रहकर फौज में भर्ती की तैयारी करना दिखाता है कि इनके संकल्प कितने मजबूत हैं।

श्मशान में रह रहे इन लड़कों को जो चीज सबसे ज्यादा बेचैन करती है, वो है दीवारों पर चारों ओर लिखे दोहे। सभी मोह-माया और संसार से दूर रहने की सीख देने वाले। किताब से जैसे ही नजर हटती है, सीधे इन्हीं दोहों पर जाती है। हालांकि करीब समय के साथ यह सब भी रुटीन का हिस्सा लगने लगा है।