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कश्मीर में करने गए थे नौकरी, डरा-धमका कर कराई गई पत्थरबाजी

कश्मीर में किराए पर पत्थरबाजी करने की एक बड़ी साजिश का खुलासा हुआ है। नौकरी की खातिर कश्मीर गए कुछ युवकों को पत्थरबाजों ने अपने चंगुल में फंसाने की भरपूर कोशिश की, लेकिन युवक

न्यूज 24 ब्यूरो, पारस जैन, बागपत  (21 जून): कश्मीर में किराए पर पत्थरबाजी करने की एक बड़ी साजिश का खुलासा हुआ है। नौकरी की खातिर कश्मीर गए कुछ युवकों को पत्थरबाजों ने अपने चंगुल में फंसाने की भरपूर कोशिश की, लेकिन युवक किसी तरह उनके चंगुल से निकल आए।कश्मीर से भागकर आए सहारनपुर और बागपत के नसीम और अंकित की आपबीती सुनकर आप हैरान रह जाएंगे। ये युवक गए तो थे नौकरी के लिए, लेकिन जब कश्मीर पहुंचे तो वहां पत्थरबाजों के चंगुल में फंस गए। युवकों को अंदाजा भी नहीं था कि रोजगार की तलाश में कश्मीर पहुंचने पर उनके साथ ऐसा सुलूक होगा। ले जाया तो गया सिलाई के काम पर, लेकिन कश्मीर में जो उनके साथ हुआ वो हैरान करना वाला था। फैक्ट्री मालिक उनपर पत्थरबाजी करने का दबाव बनाने लगा। उन्हें कश्मीरी वेशभूषा पहने पर मजबूर किया गया। ज्यादा पैसों का लालच दिया गया। तरह-तरह की धमकियां दी जाने लगी, लेकिन फिर एक स्थानीय युवक इन लोगों के लिए फरिश्ता बनकर आया और किसी तरह ये लोग सही सलामत वापस अपने परिवार से आ मिले।बीती फरवरी को पश्चिमी उत्तर-प्रदेश के बागपत और सहारनपुर से नसीम और अंकित के साथ कुछ युवकों का एक ग्रुप कश्मीर के पुलवामा लस्तीपुरा में सिलाई का काम करने पहुंचा था। वहां उन्हें डिवाइन इंडस्ट्रियल फर्म में सिलाई की नौकरी मिल गई। मेहनताना के तौर पर बीस हजार रूपये महीना तय कर दिए गए। फर्म में कश्मीर के भी कई युवक साथ में काम करते थे, लेकिन सिलाई कराने की जगह कुछ दिन बाद ही उनसे सफाई कराई जाने लगी। गाड़ी धुलवाई जाने लगी। इतना ही नहीं उन पर दबाव बनाया गया कि वह पत्थरबाजी करें और अगर ऐसा नहीं करते है तो नतीजा अच्छा नहीं होगा।पत्थरबाजों के बीच खुद को फंसा देख युवकों को घर वापसी की चिंता सताने लगी। कुछ के साथ उनका परिवार भी साथ था। कुछ समझ नहीं आ रहा था कि करें तो क्या करें। आफत की इस घड़ी में एक स्थानीय व्यक्ति से मदद मांगी गई, लेकिन उसने कश्मीर से निकालने के लिए दस हजार रूपये की शर्त रख दी। नसीम ने अपने घर से दस हजार रूपये मंगवाए और साथियों के साथ किसी तरह अपने गांव पहुंचा।अब भी नसीम और उसके साथियों को कश्मीर से धमकी भरे फोन मिल रहे है। पीडित युवकों का कहना है कि उन्होंने पुलिस से शिकायत भी की है, लेकिन किसी तरह की कोई कोई मदद नहीं मिल रही है क्योंकि मामला बड़ा है ओर वो भी कश्मीर से जुडा, इसीलिए पुलिस भी इस मामले में बात करने से बचती नजर आ रही है। हालांकि बागपत से सांसद और केंद्रीय मंत्री डा. सत्यपाल सिंह ने इस मामले में जांच कराने की बात कही है।वहीं बड़ौत नगरपालिका परिषद के अध्यक्ष अमित राणा ने शक जताया है कि यहां से युवकों को ले जाकर कश्मीर में कहीं आंतकी गतिविधियों के लिए ट्रेड तो नहीं किया जाता। वाकई मामला बेहद गंभीर है, जिसको लेकर खुफिया विभाग भी सक्रिय हो चला है, लेकिन सवाल ये कि नौकरी के नाम पर कश्मीर ले जाए गए और न जाने कितने लोग ऐसे ही पत्थरबाजों के चंगुल में फंसे हो।

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