...तो क्या फिर सियासत का शिकार हुआ 'शक्तिमान'? रातों-रात गायब हो गई मूर्ति

अधीर यादव, नई दिल्ली (12 जुलाई): उत्तराखंड की राजनीति में भूचाल लाने वाले शक्तिनाम का नाम आपने सुना होगा। शक्तिमान उत्तराखंड पुलिस का घोड़ा था। उसपर एक प्रदर्शन के दौरान बीजेपी विधायक ने लाठियों से वार किया था। आरोप लगा था कि उसी के चलते शक्तिमान की टांग काटनी पड़ी और फिर उसकी मौत हो गई। इसे सियासत में शक्तिमान की शहादत माना गया। इस शहादत को भुनाने के लिए मुख्यमंत्री हरीश रावत ने स्मारक बनवाया। मूर्ति लग चुकी थी। लेकिन एक रात मूर्ति गायब। राजनीति की इस अश्व-कथा में इतने क्लाईमेक्स हैं कि आप हैरान रह जाएंगे।

क्या हुआ था, कैसे हुआ था, क्यों हुआ था, इसका पूरा सच तो अभी तक नहीं आ पाया है, जानकारी बस इतनी है कि शक्तिमान राजनीति का शिकार हुआ था। ऐसी राजनीति जिसमें उसे तिल तिल कर मौत मिली। बीजेपी की लाठी से मरे शक्तिमान को कांग्रेस ने शहीद का दर्जा दिया था। चौराहे पर शक्तिमान की यादगार प्रतिमा लगाई गई थी। लेकिन घोड़े से रत्तीभर भी इंसानियत नहीं दिखाने और राजनीति में इंसानों के घोड़े होते जाने की कहानी का क्लाईमेक्स ये है कि शक्तिमान की प्रतिमा रातोंरात चौराहे से गायब कर दी गई। आप यकीन नहीं करेंगे इसके पीछे  जो वजह बताई जा रही है वो ये कि अगर चौराहे पर शक्तिमान रहा तो उत्तराखंड में हरीश रावत की सरकार नहीं रह पाएगी। अब अश्वदोष में उलझे मुख्यमंत्री ने मौन साध लिया है। 

देहरादून के विधानसभा चौक पर दो दिन पहले ही शक्तिमान की विशालकाय प्रतिमा लगाई गई थी। शक्तिमान की मौत पर बीजेपी को घेरने वाली कांग्रेस इसकी याद को हमेशा संजोकर ऱखने वाली थी। सोमवार को इसके उद्घाटन का लंबा चौड़ा प्लान था। मुख्यमंत्री हरीश रावत खुद अपने कर कमलों से अश्व प्रतिमा का अनावरण करने वाले थे। शामियाने वाले, मिठाई वाले, बैंड वाले बाजे वाले सब बुक थे। कि पता चला अचानक कहीं से बेजान दारूवाला नाम के भविष्यवक्ता ने लोकतंत्र के योद्धाओं का सारा आत्मविश्वास चकनाचूर कर दिया। शक्तिमान को चौराहे से उठाकर पुलिस लाइन में फेंक दिया गया। खबरों के मुताबिक ज्योतिषशास्त्र के बेजान ने जनता के चुने हुए मुख्यमंत्री की ये कहकर जान अटका दी कि शक्तिमान की हवा में लहराती हुई टांग 2017 में उनकी वापसी की उम्मीदों को तोड़ देगी। 

गणतंत्र में ग्रहों की चाल देखिए कि चार दिन बाद शक्तिमान की प्रतिमा का अनावरण होना था और मंगलवार को सुबह लोग सोकर जगे तो शक्तिमान गायब मिला। खबर उड़ी तो पता चला कि हरीश रावत के लिए घोड़ा अनलकी है। हॉर्स ट्रेडिंग के आरोपों से अब तक बरी नहीं हुए हैं। सो अब घोड़े के नाम से भी घबराने लगे हैँ। 2017 में उत्तराखंड में चुनाव हैँ। दिल्ली से लेकर देहरादून तक बवंडर मचा हुआ है। पता नहीं क्या होगा। इसलिए राजनीति के घबराए हुए घुड़सवार ने घोड़े को ही पुलिसलाइन में चिनवा दिया। सॉरी शक्तिमान तुम फिर सियासत के शिकार हुए।