Rajasthan: मेवाड़ की धरती से उठी मांग, केसरिया में हरा-हरा…राजस्थान में वसुंधरा

राजस्थान विधानसभा चुनाव (Rajasthan Assembly Elections) में अभी तो लगभग 18 महीने का समय बाकि है, लेकिन इससे पहले राजस्थान भाजपा में मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर खींचतान बढ़ गई है।

Rajasthan: मेवाड़ की धरती से उठी मांग, केसरिया में हरा-हरा…राजस्थान में वसुंधरा
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जयपुर: राजस्थान विधानसभा चुनाव (Rajasthan Assembly Elections) में अभी तो लगभग 18 महीने का समय बाकि है, लेकिन इससे पहले राजस्थान भाजपा में मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर खींचतान बढ़ गई है। राजस्थान भाजपा कई धड़ों में बंटी हुई नजर आती है। इनमें से एक धड़ा पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे (Vasundhara Raje) का है जो आने वाले 2023 के विधानसभा चुनाव में इनको मुख्यमंत्री का मुख्य चेहरा बनवाना चाहता है। 


देखा जाए चुनाव से ठीक पहले वसुंधरा राजे के जिलों के दौरे होने से विरोधी खेमा सतर्क हो गया है। पूर्व सीएम हमेशा की तरह चुनाव से एक-सवा साल पहले प्रदेश के दौरे पर निकलती रहीं है। लेकिन इस बार विरोधी खेमा ज्यादा सतर्क है। वसुंधरा राजे के उदयपुर दौरे के दौरान समर्थकों ने केसरिया में हरा-हरा, राजस्थान में वसुंधरा के नारे लगाए। जिस समय यह नारेबाजी हो रही थी उस समय नेता प्रतिपक्ष गुलाब चंद कटारिया भी वसुंधरा राजे के साथ मौजूद थे।


बता दें कि वसुंधरा राजे इन दिनों प्रदेश के विभिन्न जिलों में दौरा कर लोगों से संपर्क साध रही है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि राजे के काम करने का तरीका हमेशा से अनूठा रहा है। वह चुनावों से साल-सवा साल पहले एक्टिव मोड में आ जाती है। 


वहीं हाल में कोटा में हुई प्रदेश बीजेपी की कार्यसमिति बैठक कई कारणों से चर्चा में रही. जहां बैठक शुरू होने से पहले वसुंधरा समर्थकों के साथ धक्का-मुक्की से सियासी पारा गरमाया वहीं बैठक में अपने संबोधन से पहले राजे वहां से चली गई थी। इसके अलावा वसुंधरा समर्थक पूर्व विधायक भवानी सिंह राजावत को बैठक में शामिल नहीं होने दिया था। 


गौरतलब है कि बीजेपी आलाकमान ने काफी दिनों पहले ही साफ कर दिया था कि राजस्थान विधानसभा चुनाव पीएम मोदी और बीजेपी के चुनाव चिन्ह कमल पर लड़ा जाएगा। लेकिन वसुंधरा समर्थक काफी समय से राजे को सीएम फेस घोषित करने की मांग कर रहे हैं। 

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