शिक्षा व स्वास्थ्य मानकों पर तय होगी राज्यों की रैंकिंग

 

नई दिल्ली(28 जुलाई): चुनाव से पहले राज्यों में सत्तारूढ़ पार्टियां मतदाताओं को लुभाने के लिए विकास संबंधी तरह-तरह के दावे करती हैं लेकिन उनके दावों में कितनी सच्चाई है यह पता करना आम लोगों के लिए मुश्किल होता है। नीति आयोग अब ऐसी व्यवस्था बनाने जा रहा है जिससे यह पता करना बेहद आसान होगा कि विकास के मानकों खासकर शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में कौन सा राज्य आगे है और कौन पीछे?

साथ ही यह भी पता किया जा सकेगा इन बुनियादी सामाजिक सुविधाओं के मामले में किस राज्य में कितनी तरक्की हो रही है? नीति आयोग सामाजिक विकास के प्रमुख मानकों पर राज्यों की रैंकिंग करने की तैयारी कर रहा है। नीति आयोग के एक उच्च अधिकारी ने कहा कि स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे सामाजिक विकास मानकों पर आधारित राज्यों की यह रैंकिंग अगले कुछ महीनों में शुरू हो सकती है। रैंकिंग हर तीन महीने पर आएगी और ऑनलाइन उपलब्ध होगी। आयोग विश्व बैंक के साथ मिलकर यह रैंकिंग तैयार करेगा। नीति आयोग ने इस प्रस्तावित रैंकिंग की रूपरेखा बुधवार को यहां राज्यों के मुख्य सचिवों की बैठक में रखी। असल में इस रैंकिंग की जरूरत इसलिए पड़ रही है क्योंकि विगत वर्षों में भारत ने आर्थिक तरक्की तो की है लेकिन शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण के संबंध में उतनी प्रगति दिखाई नहीं दी है।

हालांकि माना जा रहा है कि नीति आयोग की इस पहल पर राज्यों से तीखी प्रतिक्रिया आ सकती है क्योंकि स्वास्थ्य राज्यों का ही विषय है। रैंकिंग में स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता, गुणवत्ता और लोगों की पहुंच के आधार पर राज्यों का स्थान तय होगा। शिक्षा से जुड़े विभिन्न मानकों पर भी राज्यों की स्थिति दी जाएगी।