जम्मू-कश्मीर में पहली बार आरएसएस की होगी बड़ी बैठक, यह है उद्देश्य

नई दिल्ली ( 16 मई ): राष्ट्रीय स्वयं संघ कश्मीर में जारी अशांति के बीच जम्मू में जुलाई 2017 में अपनी वार्षिक समीक्षा बैठक का आयोजन करेगा। संघ का उद्देश्य साफ तौर पर अलगाववादियों को संदेश देना है कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के नेता 3 दिनों तक चलने वाली इस बैठक में शामिल होंगे जिसका आयोजन 18 से 20 जुलाई के बीच होगा।


रिपोर्ट के 'कश्मीर घाटी में अलगाववादियों को यह संदेश देने के लिए कि यह भारत का अभिन्न हिस्सा है और संघ उसकी एकता के लिए प्रतिबद्ध है, बैठक का आयोजन किया जाएगा। इसके लिए समय और स्थान तय कर लिए गए हैं।' सूत्रों ने साथ ही संकेत दिए कि बैठक में पथराव और सीआरपीएफ जवानों पर हमले की घटनाओं पर चर्चा हो सकती है।


आरएसएस के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख मनमोहन वैद्य ने कहा, 'यह गुजरे साल की घटनाओं और गतिविधियों का जायजा लेने और साथ ही आने वाले समय के लिए कार्य योजना का मसौदा तैयार करने के उद्देश्य से की जाने वाली प्रांत प्रचारकों की वार्षिक समीक्षा बैठक है।' वैद्य ने कहा कि बैठक में ग्रीष्म प्रशिक्षण शिविरों की समीक्षा की जाएगी जिसका आरएसएस हर साल आयोजन करता है।


उन्होंने कहा कि जम्मू स्थित क्षेत्रीय कार्यालय के बैठक का आयोजन करने के लिए आगे आने पर यह फैसला किया गया। प्रचार प्रमुख ने कहा, 'पहले जम्मू में हमारा छोटा सा कार्यालय था, लेकिन पिछले कुछ सालों में इसका विस्तार हुआ। अब उन्होंने स्वेच्छा से बैठक के आयोजन की पेशकश की। यह जम्मू-कश्मीर में संघ की पहली बड़ी बैठक होगी।' उन्होंने कहा कि बैठक में कोई बड़ा फैसला नहीं लिया जाएगा, लेकिन देश के सामने मौजूद विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की जा सकती है।