पत्थरबाजों से निपटने के लिए सुरक्षाबलों को मिलेगा 'मिर्ची बम का बाप'


नई दिल्ली (29 मार्च): कश्मीर में हिंसक प्रदर्शनों पर नियंत्रण के लिए तीखी जेली वाले ग्रेनेड सुरक्षा बलों को दिये जा सकते हैं। इसे मिर्ची बम का बाप कहा जा रहा है। यह बम फटने के बाद ऐसी गैस छोड़ता है जिससे आंखों में तीखी जलन होती है। इसके फटने के बाद पत्थरबाजों का सुरक्षाबलों के सामने टिकना नामुमकिन होगा भले ही वो कितना ही नकाब क्यों न पहन लें। इसके बावजूद पेलेट गन का इस्तेमाल जारी रहेगा। किंतु पेलेट गनों का इस्तेमाल तभी किया जाएगा जब सुरक्षाबल पत्थरबाजों पर काबू पाने में नाकाम रहेंगे और बिल्कुल अंतिम तौर पर इसे इस्तेमाल किया जाएगा।


उन्होंने बताया कि नये हथियार के तौर पर दिये जाने वाले सेमी सॉलिड कैमिकल ओलोइयोरेसिन के साथ तीखे जेल ग्रेनेड में डाले जा सकते हैं, ताकि उपद्रवी भीड़ से निपटा जा सके। ऐसे ग्रेनेड इस्तेमाल करने का सुझाव केंद्रीय गृह सचिव राजीव महर्षि की अध्यक्षता में हुई एक बैठक में आया।

ओलोइयोरेसिन के ग्रेनेड तत्काल समाधान के तौर पर उभरकर आए और जरूरी परीक्षणों के बाद सुरक्षा बल इसका इस्तेमाल कर सकेंगे। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) की रक्षा प्रयोगशाला रक्षा अनुसंधान और विकास प्रतिष्ठान (डीआरडीई) की ओर से इसका निर्माण किया जा रहा है। बहरहाल, बैठक में आम राय बनी कि पेलेट गन का इस्तेमाल ऐसी स्थिति में जारी रहना चाहिए जब हिंसक भीड़ को काबू में करने में सुरक्षाबल नाकाम हो गये हों।