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बिहार: 40 किमी प्रतिघंटा की ज्यादा स्पीड से नहीं चलेंगी स्कूल बसें

सड़क दुर्घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए बिहार परिवहन विभाग ने वाहनों में स्पीड गर्वनर (गति नियंत्रक) लगाने का आदेश दिया है। बच्चों को स्कूल पहुंचाने वाली बसों की अधिकतम गति सीमा 40 किलोमीटर प्रतिघंटा निर्धारित की गई है।

सौरभ कुमार, पटना ( 2 मई ): बिहार सरकार ने सड़क दुर्घटनाओं पर रोक लगाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सड़क दुर्घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए बिहार परिवहन विभाग ने वाहनों में स्पीड गर्वनर (गति नियंत्रक) लगाने का आदेश दिया है। बच्चों को स्कूल पहुंचाने वाली बसों की अधिकतम गति सीमा 40 किलोमीटर प्रतिघंटा निर्धारित की गई है।स्कूल बसों की रफ्तार पर लगाम लगाने की पुख्ता तैयारी शुरू हो गई है। गति सीमा पर लगाम के लिए 15 मई तक पटना सहित राज्य भर के स्कूली बसों में स्पीड लिमिट डिवाइस (स्पीड गवर्नर) लगाना अनिवार्य हो गया है। इस डिवाइस के बस में लग जाने के बाद उसकी अधिकतम गति सीमा 40 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक नहीं हो सकेगी। आदेश का उल्लंघन करने वालों पर परिवहन अधिनियम की धारा के तहत प्राथमिकी दर्ज की जाएगी। इसके अलावा बसों का फिटनेस सर्टिफिकेट रद्द कर दिया जाएगा।केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय ने दुर्घटनाओं पर नियंत्रण के लिए वाहनों को निर्धारित गति सीमा परिचालन के लिए स्पीड गवर्नर लगाना अनिवार्य कर दिया है। 1 मई से बिना स्पीड गर्वनर वाले वाहनों का निबंधन रोक दी जाएगी।मंत्रालय ने दो श्रेणी 60 और 80 किलोमीटर प्रति घंटे निर्धारित की है। राज्य सरकार को शक्ति दी गई है कि अपने शहर और सड़क के अनुसार गति सीमा में संशोधन कर सकती है, लेकिन अधिकतम सीमा 80 किलोमीटर से अधिक नहीं होगी। स्कूली बच्चों की सुरक्षा के मद्देनजर सीबीएसइ ने मान्यता प्राप्त स्कूलों के बसों के लिए 40 किलोमीटर अधिकतम गति सीमा निर्धारित किया है।बिहार सरकार ने प्रथम चरण में स्कूली बसों की गति सीमा सीबीएसइ द्वारा निर्धारित मानक के अनुसार अधिकतम 40 किलोमीटर प्रति घंटे से परिचालन के लिए स्पीड लिमिट डिवाइस (स्पीड गर्वनर) लगाने के लिए 15 मई तक मोहलत दी है। राज्य के सभी स्कूल प्रबंधन को वाहनों में स्पीड गर्वनर नहीं लगाने पर फिटनेस और परमिट रद्द करने की चेतावनी दी है।परिवहन विभाग के आंकड़े के मुताबिक बिहार में अब तक 70 हजार वाहनों में स्पीड गवर्नर लगे हुए हैं। अधिकांश वाहनों में कंपनी द्वारा स्थापित डिवाइस है। करीब 12 से 15 लाख वाहनों में स्पीड गर्वनर लगाने के लिए 10 एजेंसी का चयन कर लिया है। सभी कंपनियों के डिवाइस का प्रदर्शन किया गया है। जिला परिवहन पदाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि स्पीड गर्वनर लगाने वाले कंपनियों को अपने जिले में ट्रेड लाइसेंस जारी करें। ट्रेड लाइसेंस के पहले मोटर वाहन निरीक्षक वितरक और खुदरा विक्रेता के प्रतिष्ठान की भौतिक जांच करेंगे।

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