वैंपायर स्टार : कैमरे में कैद हुआ दूसरे तारे को शिकार बनाने वाला तारा

नई दिल्ली (30 जनवरी): भारत के पहले  अंतरिक्ष वेधशाला उपग्रह, एस्ट्रोसैट ने एक ‘वैंपायर’ तारे की दुर्लभ गतिविधि को कैमरे में कैद किया है। वैंपायर तारा उस तारे को कहते हैं जो दूसरे तारे को अपना शिकार बनाता है।

एस्ट्रोसैट ने जिस वैंपायर तारे की प्रक्रिया की तस्वीरें उतारी हैं, वह छह अरब साल पुराना है। वह अपने से बड़े एक तारे का द्रव्यमान और ऊर्जा सोख रहा है। ऐसे तारे अपने साथी तारों का द्रव्यमान और ऊर्जा सोखकर अंतत: उनको मार डालते हैं। उनका यह कार्य लोगों का लहू पीने वाले उन कल्पित पिशाचों के समान है, जिन्हें वैंपायर कहते हैं। इन तारों को ‘ब्लू स्ट्रैगलर’ भी कहते हैं।

भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान के प्रोफेसर अन्नपूर्णी सुब्रमण्यम ने कहा, सबसे लोकप्रिय व्याख्या यह है कि ये दोहरी (बाइनरी) प्रणालियां हैं। इनमें एक छोटा तारा अपने बड़े साथी तारे के द्रव्यमान को सोखकर बड़ा बन जाता है। इस प्रक्रिया से छोटा तारा पहले से अधिक बड़ा, ज्यादा गर्म और ज्यादा नीला बन जाता है। इस कारण वह कम आयु का लगता है।

किसी तारे के दूसरे तारे का शोषण करने की घटना कोई नई चीज नहीं है। लेकिन एस्ट्रोसैट ने दूरबीन के जरिये इस पूरी प्रक्रिया की तस्वीरें ली हैं, जो ब्लू स्टैगलर तारों के निर्माण को समझने के लिए महत्वपूर्ण सामग्री होगी।