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यूपी गठबंधन: अखिलेश ने पिछले दरवाजे से खुद को किया माया का उत्तराधिकारी घोषित

लखनऊ के ताज पैलेस में आगामी लोकसभा चुनावों के लिए प्रेस कांफ्रेंस करके बसपा अध्यक्ष मायावती और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सीट बंटवारे का ऐलान कर दिया। अब राजनैतिक विशेषज्ञ

न्यूज 24 ब्यूरो, दयाकृष्‍ण चौहान, नई दिल्ली (12 जनवरी): लखनऊ के ताज पैलेस में आगामी लोकसभा चुनावों के लिए प्रेस कांफ्रेंस करके बसपा अध्यक्ष मायावती और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सीट बंटवारे का ऐलान कर दिया। अब राजनैतिक विशेषज्ञ इस बात का विश्लेषण करने में लगे हैं कि दोनों का गठबंधन प्रदेश में कितना सफल होगा, लेकिन एक बात जिसपर अभी तक शायद ही किसी की नजर गई हो, वह यह है कि इस गठबंधन से अगर आने वाले समय में कोई बड़ा नेता बनकर उभरेगा तो उसका नाम अखिलेश यादव होगा। आज की प्रेस कांफ्रेंस में अखिलेश ने यह साफ कर दिया कि वह सपा अध्यक्ष तो हैं ही, लेकिन आने वाले समय में मायावती के उत्तराधिकारी भी होंगे।

इस बात को हम ऐसे ही नहीं कर रहे, बल्कि पूरे विश्लेषण के सामने आपके साथ रखेंगे। प्रेस कांफ्रेंस में मायावती करीब 20 मिनट बोली और अखिलेश 5 से 7 मिनट। लेकिन इतने कम समय में अखिलेश ने कई ऐसी बातें कहीं जिससे यह पता चलता है कि वह आगे चलकर मायावती के प्रतिद्वंदी नहीं बल्कि उनके उत्तराधिकारी बनने के लिए पूरी तरह से तैयार है। अखिलेश ने पहली बार मायावती के सम्मान और अपमान से खुद को जोड़ा। इसके साथ ही यह भी कह दिया कि यूपी से ही अगला प्रधानमंत्री होगा। यहीं नहीं अखिलेश यादव ने कहा कि उपचुनावों के नतीजों के बाद बसपा प्रमुख ने कहा था कि अगर लोकसभा चुनावों के लिए अखिलेश को गठबंधन करना है तो दो कदम पीछे हटना पड़ेगा, लेकिन मायावती ने उनको बराबर सीट देकर उनको सम्मान दिया।

अखिलेश के बयान का विश्लेषण:

1: मायावती का सम्मान मेरा सम्मान और उनका अपमान मेरा अपमान- ऐसा पहली बार हुआ है कि कभी पानी पी-पीकर एक-दूसरे को कोसने वाले लोग अब एक-दूसरे को इतना सम्मान देने लगे हैं। इस समय गठबंधन करना भले ही दोनों की मजबूरी हों, क्योंकि 2014 में बसपा को प्रदेश में जहां एक भी सीट नहीं मिली थी, वहीं अखिलेश यादव अपनी पार्टी को कुछ ज्यादा सफलता नहीं दिला पाए थे, जिसकी आलोचना खुद सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव भी कई बार कर चुके थे। ऐसे में पिता और चाचा सबको सपा से साइडलाइन कर खुद अध्यक्ष पद पर काबिज होने के बाद अखिलेश के सामने भी पार्टी को मजबूत करने के साथ-साथ आने वाले समय में प्रदेश में सबसे बड़ा चेहरा बनने की चुनौती है। लेकिन इससे बड़ी बात जो है, वह यह है कि आने वाले समय में अखिलेश यादव यूपी में एकमात्र ऐसे नेता होंगे जो मुसलमान, यादव और दलितों वोटबैंक पर मजबूत पकड़ रखेगा। इसी को देखते हुए अखिलेश ने मायावती के सम्मान और अपमान से खुद को जोड़ा।

2: यूपी से ही होगा अगला पीएम- आज के समय में बसपा का अगर कोई चेहरा है तो वह सिर्फ मायावती ही है, लेकिन जिस तरह से अखिलेश यादव ने आज उनकी हां में हां मिलाई, उसे देखकर एक बात साफ हो गया कि आने वाले वक्त में वह मायावती की विरासत पर भी नजर रखे हुए हैं। अभी यूपी विधानसभा चुनावों में 4 साल बचे हुए हैं और मायावती ने भी प्रेस कांफ्रेंस में यह साफ कर दिया है कि यह गठबंधन लंबा चलेगा और विधानसभा में भी जारी रहेगा। ऐसे में अगर 2022 में उत्तर प्रदेश में दोनों पार्टियां साथ मिलकर चुनाव लड़ती है तो यह बात अभी से स्पष्‍ट है कि उनके आगे कोई नहीं टिकेगा। ऐसे में कौन सीएम होगा ? यह कहना जल्दबाजी होगी। लेकिन अखिलेश के आज के तेवर को देखकर लगता है कि अगर मायावती केंद्र की राजनी‍ति में नहीं गईं तो वह मायावती को ही सीएम बनाएंगे।

यह तर्क भले ही आपको सही नहीं लगे, लेकिन अखिलेश यादव के हिसाब से यही सही होगा। क्योंकि गठबंधन में 5 साल की सरकार चलाने के साथ-साथ उनके पास कई बड़े मंत्रालय होंगे और फिर वह चुपचाप रहकर आगे की तैयारी करते दिखेंगे। अखिलेश की उम्र काफी कम हैं और मायावती ने अभी तक कोई भी उत्तराधिकारी तय नहीं किया है। अखिलेश भी यही चाहेंगे कि बसपा सुप्रीमों अगर 5 साल तक सीएम रहें भी तो आने वाले समय में प्रदेश में उनकी ही बोलबाला होगा, क्योंकि वह मुसलमान, यादव और दलित सबको साथ लेकर चलने वाले नेता बन चुके होंगे। उस समय में कोई ऐसा नेता भी उनके आस-पास नहीं होगा, जोकि उनको चुनौती दे सके। अभी तक अखिलेश को दलित विरोधी और मुसलमान व यादवों का हितेशी माना जाता था, लेकिन जल्द ही वह दलितों को भी अपने साथ लाने में कामयाब होंगे।

इसके अलावा अखिलेश यादव ने परिवार में चल रही कलह से निकलते हुए खुद को सपा का सबसे बड़ा नेता घोषित भी कर दिया। मायावती ने अभी तक परिवार के किसी भी व्यक्ति को राजनीति में नहीं उतारा है। ऐसे में अगर दोनों ही परिवार में कोई बड़ा चेहरा होगा तो वह सिर्फ और सिर्फ अखिलेश यादव ही है।

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