देशहित में भूल गई हूं गेस्ट हाउस कांड: मायावती

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (12 जनवरी): लोकसभा चुनावों के लिए उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने गठबंधन का ऐलान कर दिया है। कभी एक-दूसरे को सबसे बड़ा दुश्मन मानने वाली सपा-बसपा ने गठबंधन की प्रेस कांफ्रेंस के दौरान मायावती ने गेस्ट हाउस कांड का जिक्र भी किया। उन्होंने कहा कि बीजेपी को हराने के लिए देशहित में गेस्ट हाउस कांड को भूलकर गठबंधन का फैसला लिया गया है।

मायावती ने अपनी प्रेस कांफ्रेंस में 1995 में हुए गेस्ट हाउस कांड का जिक्र करते हुए कहा कि वह देशहित में लखनऊ गेस्ट हाउस कांड से भी ऊपर उठकर यह गठबंधन कर रही हैं। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी के साथ सन 1993 में विधानसभा चुनावों में काशीराम जी और मुलायाम सिंह जी के गठबंधन में चुनाव लड़ा गया और सरकार बनाई गई थी। बीजेपी की जहरीली, सांप्रदायिक और जातिवादी राजनीतिक से प्रदेश को दूर रखने की मंशा ऐसा किया गया था। देश में दोबारा ऐसे हालातों के बीच बीएसपी ने एक बार फिर ऐसा करने की जरूरत महसूस की है।

यूपी फिर देगा देश को पीएम: अखिलेश

समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गठबंधन का ऐलान करते हुए कहा कि देश को सबसे ज्यादा पीएम देने वाला उत्तर प्रदेश है और एक बार फिर यूपी ही देश को प्रधानमंत्री देगा। इससे एक बात साफ हो गई कि आने वाले समय में अगर बसपा-सपा गठबंधन को अच्छी सीट मिल जाती हैं तो गठबंधन की तरफ से मायावती को पीएम के तौर पर उम्मीदवार बनाया जा सकता है। मायावती ने इस गठबंधन को विधानसभा चुनावों में भी जारी रखने को कहकर सियासी गलियारों में यह भी हवा दे दी है कि शायद अब मायावती केंद्र और अखिलेश प्रदेश संभालेंगे। प्रेस कांफ्रेंस के दौरान अखिलेश ने बताया कि उन्होंने गठबंधन के लिए उसी दिन से मन बना लिया था, जब बीजेपी नेताओं ने मायावती के खिलाफ अभद्र टिप्पणी की थी और भाजपा ने उन पर कार्यवाही करने के बजाय मंत्री बन इनाम दिया। इसी के साथ उन्होंने कहा कि मायावती ने गठबंधन के लिए दो कदम पीछे हटने के लिए कहा था, लेकिन उन्होंने बराबरी का मान दिया। आज से मायावती का अपमान मेरा अपमान होगा। प्रेस कांफ्रेंस में दोनों ने साफ कर दिया कि वह 38-38 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। जबकि कांग्रेस के लिए रायबरेली और अमेठी की सीट छोड़ दी गई है। इसके अलावा बाकी दो सीटें सहयोगियों को दी जाएगी।

उड़ने वाली है गुरु-चेले की नींद: मायावती

बीजेपी को केंद्र में आने से रोकने के लिए मायावती ने उत्तर प्रदेश में गठबंधन को जरूर बताया। उन्होंने कहा कि इस गठबंधन से नरेंद्र मोदी और अमित शाह, दोनों गुरु-चेले की नींद उड़ाने वाली है। जनहित में सपा और बसपा का गठबंधन हुआ। बीजेपी के तानाशाही रवैये से जनता परेशान है।

कांग्रेस-बीजेपी एक जैसी: मायावती

बसपा सुप्रीमो ने कांग्रेस को गठबंधन में शामिल नहीं करने पर कहा कि आजादी के बाद से देश में सबसे ज्यादा कांग्रेस की सरकार रही है। बीजेपी और कांग्रेस दोनों की नीतियां एक ही जैसी है। इनकी राजनीति में गरीबी का इजाफा हुआ है। रक्षा डीलों में दोनों ही पार्टियों ने गड़बड़ी की हैं, पहले कांग्रेस ने बोफोर्स किया और अब बीजेपी जल्द ही राफेल की डील में गड़बड़ी के चलते देश की सत्ता से बाहर जाने वाली है। इन जैसी पार्टियों को हमारे साथ का फायदा तो मिल जाता है लेकिन इन जैसी पार्टियों के साथ गठबंधन से हमें कोई फायदा नहीं होता, हमें पहले इसका अनुभव हो चुका है और यह अनुभव पिछले विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी को भी हो चुका है, इसकी वजह से हम कांग्रेस के साथ गठबंधन नहीं करेंगे। कांग्रेस के राज में घोषित इमरजेंसी थी और अब अघोषित। सरकारी मशीनरी का दुरूपयोग कर प्रभावी विरोधियों के खिलाफ गड़े मुकदमे उखाड़ कर परेशान कर रहे हैं। कांग्रेस के साथ सपा बसपा गठबंधन का कोई खास फायदा नहीं होता। हमारे वोट तो ट्रासंफर हो जाता है लेकिन कांग्रेस का वोट ट्रान्सफ़र नहीं होता या अंदरूनी रणनीति के तहत कहीं और करा दिया जाता है।

आपको बता दें कि 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को मात देने लिए 23 साल पुरानी दुश्मनी भुलाकर सपा-बसपा एक बार फिर गठबंधन का आधिकारिक ऐलान किया। 1993 में मुलायम-कांशीराम की जोड़ी ने बीजेपी को पटखनी दी थी। अब 2019 में बीजेपी को हराने के लिए अखिलेश-मायावती की जोड़ी एक साथ आई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2019 में 1993 जैसे हालात नहीं है, यही वजह है कि माया-अखिलेश वाले इस गठबंधन के लिए 25 साल पहले जैसे नतीजे दोहराना बड़ी चुनौती माना जा रहा है।

जनता देख रही है अपमान- कांग्रेस

एसपी-बीएसपी गठबंधन पर कांग्रेस की तरफ से पहला बार कोई बयान सामने आया है। कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने एसपी-बीएसपी गठबंधन पर निशाना साधते हुए कहा कि इस अपमान को जनता देख रही है। हम सब को साथ लेकर चलने वाले दल हैं। एसपी-बीएसपी के साथ और कांग्रेस के अलग चुनाव लड़ने से गैर-बीजेपी वोटों का विभाजन होगा। सूत्रों ने बताया कि इस गठबंधन में शामिल होने के लिए कांग्रेस 20 सीट मांग रही थी, जबकि सपा और बसपा उनको 5 से ज्यादा सीट देने को तैयार नहीं थी। इसीलिए कांग्रेस ने खुद को गठबंधन से अलग करने का निर्णय किया।