INSIDE STORY: वियतनाम यात्रा पर रवाना हुए पीएम मोदी, जानिए चीन क्यों चिंता में...

डॉ. संजीव त्रिवेदी और डॉ. संदीप कोहली नई दिल्ली (2 सितंबर): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को वियतनाम की यात्रा पर रवाना हो गए। वियतनाम दौरे के जरिए पीएम मोदी चीन को कड़ा संदेश देंगे। एक तरफ भारत की उत्तरी सीमा पर चीन और पाकिस्तान की जुगलबंदी पर लगाम लगाने की जरूरत है। तो दूसरी तरफ दक्षिण चीन सागर को लेकर चीन को घेरने के लिए अंतर्राष्ट्रीय दबाव बनाने की भी जरूरत है। दक्षिण चीन सागर पर अधिकार को लेकर वियतनाम और चीन के बीच लम्बे समय से तनाव की स्थिति चल रही है। भारत, अमेरिका और जापान के साथ मिलकर इस मुद्दे पर चीन को घेरना चाहता है। ऐसे में पीएम मोदी का यह दौरा अहम माना जा रहा है। वियतनाम के बाद पीएम मोदी चीन के हांग्जो के लिए रवाना होंगे। जहां उन्हें जी20 सम्मेलन में हिस्सा लेना है। चीन में 4-5 सितंबर को जी20 सम्मेलन होना है। 

जानिए क्यों खास है पीएम मोदी की वियतनाम यात्रा...  - 15 साल बाद कोई भारतीय प्रधानमंत्री वियतनाम के दौरे पर जा रहा है। - इससे पहले 2001 में तत्कालीन पीएम अटल बिहारी वाजपेयी ने वियतनाम की यात्रा की थी। - शनिवार को भारत और वियतनाम के बीच कई सैन्य समझौते होंगे। - भारत का मानना है कि विएतनाम भारत की एक्‍ट इस्‍ट पॉलिसी का केंद्रीय स्‍तंभ है।  - विएतनाम के साथ रक्षा और सुरक्षा के साथ ही व्‍यापार और मैरीटाइम सहयोग पर समझौते हो सकते हैं। - विएतनाम के साथ भारत का द्विपक्षीय व्‍यापार 7.8 बिलियन का है और अतिरिक्त व्‍यापार करीब 2.8 बिलियन डॉलर का है। - इस यात्रा के दौरान भारत वियतनाम को ब्रह्मोस मिसाइल की टेक्नोलॉजी बेच सकता है - ब्रम्होस खरीदने में वियतनाम लंबे वक्त से कोशिश कर रहा है। - इस यात्रा के दौरान वियतनाम की सेना को चार पेट्रोल बोट्स की सप्लाई पर करार हो सकता है। - भारत वियतनाम के साथ साइबर सिक्योरिटी पर पार्टनरशिप कर सकता है। - साथ ही वियतनाम की सैन्य क्षमता को बढ़ाने के लिए डिफेंस हार्डवेयर के रखरखाव पर हो सकती है डील। - सैनिको की मिलिट्री ट्रेनिंग के लिए अतिरिक्त मदद के भी करार होंगे दोनों देशों में। - 100 मिलियन डॉलर की मदद करने की जो भारत ने बात की थी, उसका भी विस्तार होगा। - अक्टूबर 2014 में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने वियतनाम को 10 करोड़ डॉलर की मदद देने का भरोसा दिलाया था। - दोनो देशों के बीच अर्थव्यवस्था के अलावा स्पेस सेक्टर और हाइड्रोकार्बन ब्लॉक में निवेश पर भी डील हो सकती है। - क्रूड ऑयल प्रोजेक्ट को लेकर कई करार हो सकते हैं, यहां ओएनजीसी लंबे समय से काम कर रही है। - भारत आतंकवाद की फंडिंग पर अंकुश और कालेधन के सुरक्षित ठिकानों पर कार्रवाई के लिए ठोस उपाय भी करेगा।

वियतनाम दौरे को लेकर मोदी ने कहा... - हम वियतनाम से बेहतर इकोनॉमिक रिलेशनशिप चाहते हैं, ताकि दोनों देशों को फायदा हो सके। - यह बहुत ही महत्वपूर्ण यात्रा है। इससे भारत और वियतनाम के बीच रिश्ते बेहतर होंगे। - उन्होंने वियतनाम के लोगों को उनके नेशनल डे पर बधाई दी है।  - उन्होंने एक संदेश में कहा- "वियतनाम हमारा मित्र राष्ट्र है और उसके साथ हमारे अच्छे रिलेशन हैं।

चीन में जी20 सम्मेलन में लेंगे हिस्सा... - वियतनाम के बाद पीएम मोदी चीन के हांग्जो के लिए रवाना होंगे।  - जहां उन्हें जी20 सम्मेलन में हिस्सा लेना है।  - चीन में 4-5 सितंबर को जी20 सम्मेलन होना है।  - भारत जी20 में आतंकवाद का मुद्दा उठा सकता है। - जी20 देशों की बैठक में पीएम मोदी कई देशों के राष्ट्राध्यक्षों से मुलाकात करेंगे। - जी20 के दौरान ब्रिक्स के नेताओं की एक बैठक में हिस्सा लेंगे मोदी। - जी20 या ग्रुप ऑफ ट्वेंटी की शुरुआत 1999 में पहली बार हुई थी। - इस वर्ष 11वें जी-20 समिट का आयोजन हो रहा है।  - जी20 का मकसद वैश्विक अर्थव्‍यस्‍था से जुड़े अहम मुद्दों को एक मंच पर लाकर चर्चा करना था।  - पिछले वर्ष यानी दिसंबर 2015 में टर्की के अंटालया में जी-20 समिट का आयोजन हुआ था।  - जी-20 में अर्जेंटीना, ऑस्‍ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, चीन, फ्रांस, जर्मनी, भारत, इंडोनेशिया, इटली,  - जापान, मैक्सिको, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, टर्की, यूके और यूएस जैसे सदस्‍य शामिल हैं। 

पीएम मोदी चीन के राष्ट्रपति से करेंगे द्विपक्षीय बातचीत... - पीएम मोदी जी20 सम्मेलन से अलग चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से द्विपक्षीय बातचीत करेंगे। - सुत्रों के मुताबिक इस दौरान मोदी जिनपिंग के सामने चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) का मुद्दा उठा सकते हैं। - चीन ने CPEC परियोजनाओं के जरिए पाकिस्तान में 3 लाख करोड़ रुपए का निवेश किया है। - CPEC पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के रास्ते बलूचिस्तान के ग्वादर पोर्ट तक बनेगा। - हालांकि भारत इसका हमेशा से विरोध करता रहा है क्योंकि यह विवादित क्षेत्र है। - CPEC प्रोजेक्ट की शुरूआत 2015 में हुई थी, इसके पूरा होने तक 3 हजार किमी का रेल-सड़क नेटवर्क तैयार हो जाएगा। - यह भी कहा जा रहा है कि जिनपिंग के सामने न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप में भारत की सदस्यता का मामला भी उठा सकते हैं। - इस साल जून में चीन ने भारत की एनएसजी सदस्यता पर रोक लगा दी थी। - हालांकि अगस्त में चीन के विदेश मंत्री वांग यी के भारत दौरे पर इस मुद्दे पर काफी बातचीत की जा चुकी है।