83 साल बाद खत्म हो जाएंगे भारत-पाकिस्तान के लोग!

नई दिल्ली(4 अगस्त): जलवायु परिवर्तन का असर दुनिया पर क्या होगा इसको रिसर्च हो रहा है। ऐसे ही एक रिसर्च का कहना है कि क्लाइमेट चेंज के कारण अगले कुछ दशकों में दक्षिण एशिया का इलाका शायद लोगों और जीवों के रहने लायक नहीं रहेगा। 

-वैज्ञानिकों का अनुमान है कि जलवायु परिवर्तन के कारण भारत और पाकिस्तान सहित दक्षिण एशियाई देशों में इतनी गर्म हवाएं चलेंगी कि यहां जी पाना नामुमकिन हो जाएगा। 

-वैज्ञानिकों का दावा है कि तापमान में वृद्धि के कारण पूरी दुनिया में इतनी गर्मी और उमस हो जाएगी कि स्थितियां बर्दाश्त के बाहर हो जाएंगी। इन बदली हुई परिस्थितियों में जी पाना असंभव सा हो जाएगा। जिन इलाकों पर इस बदलाव का सबसे ज्यादा असर होगा, उनमें उत्तरी भारत, बांग्लादेश और दक्षिणी पाकिस्तान शामिल हैं। इन इलाकों की मौजूदा आबादी डेढ़ अरब से ज्यादा है। यह अनुमान हाल ही में किए गए एक रिसर्च पर आधारित है। इसके मुताबिक, गर्मी का सबसे बुरा असर तब देखने को मिलता है जब तापमान में वृद्धि के साथ-साथ उमस भी काफी ज्यादा होती है। 

- इसे 'वेट बल्ब' तापमान के नाम से जाना जाता है। इस तरीके से गणना करने पर नमी के वाष्पीकृत होने की क्षमता का पता चलता है। जब वेट-बल्ब टेंपरेचर 35 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच जाता है, तो इंसानी शरीर गर्मी के मुताबिक खुद को अनुकूलित नहीं कर पाता। जीवों के शरीर में स्वाभाविक तौर पर अनुकूलन की क्षमता होती है। 35 डिग्री सेल्सियस वेट-बल्ब तापमान होने पर इंसानों का शरीर इतनी गर्मी से खुद को बचाने के लिए ठंडा नहीं हो पाता। यही स्थिति रही तो कुछ ही घंटों में इंसान दम तोड़ सकता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि साल 2100 आते-आते भारत की 70 फीसद से ज्यादा की आबादी 32 डिग्री सेल्सियस वेट-बल्ब तापमान को झेलने पर मजबूर हो जाएगी। दो प्रतिशत आबादी को 35 डिग्री सेल्सियस वेट-बल्ब टेंपरेचर की भयावह स्थितियों का सामना करना पड़ेगा।

- अभी के जलवायु की बात करें, तो धरती का वेट-बल्ब तापमान 31 डिग्री सेल्सियस के पार जा चुका है। 2015 में ईरान की खाड़ी के इलाके में यह करीब-करीब 35 डिग्री सेल्सियस की सीमा तक पहुंच गया था। इसके कारण पाकिस्तान और भारत में लगभग 3,500 लोगों की मौत हुई थी। नए शोध के नतीजों से पता चलता है कि अगर कार्बन (ग्रीनहाउस) गैसों के उत्सर्जन को गंभीरता से कम नहीं किया गया, तो बेहद गर्म हवा के थपेड़े वेट-बल्ब टेंपरेचर को 31 डिग्री सेल्सियस से 34.2 डिग्री सेल्सियस के बीच तक ले जा सकते हैं। 

- इस रिसर्च के प्रमुख शोधकर्ता डॉक्टर अलफतेह अलताहिर मैसच्यूसिट्स इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी में प्रफेसर हैं। उन्होंने बताया, 'ऐसा हुआ तो जिंदा रहने की हमारी क्षमता एकदम कगार पर पहुंच जाएगी। 30 की उम्र के बाद तो खुद को बचाना और मुश्किल हो जाता है।' डॉक्टर अलताहिर ने आगे कहा, 'कृषि उत्पादन में कमी के कारण हमारी स्थितियां और गंभीर हो जाएंगी। ऐसा नहीं कि केवल गर्मी के कारण ही लोग मरेंगे। फसल कम होने के कारण लगभग हर एक इंसान को इन भयावह और असहनीय स्थितियों का सामना करना पड़ेगा।'