सोनिया गांधी का पीएम मोदी पर हमला, कहा- कुछ लोग काम करते हैं और कुछ श्रेय लेते हैं


न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (19 नवंबर):  कांग्रेस की पूर्व अध्‍यक्ष और यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी ने पीएम नरेंद्र मोदी पर पलटवार किया है। उन्होंने पीएम का नाम लिए बिना मनमोहन सिंह की तारीफ करते हुए कहा कि कुछ लोग काम करते हैं और कुछ लोग श्रेय लेते हैं।

सोनिया गांधी ने कहा कि डॉ.मनमोहन सिंह का व्यक्तित्व ऐसा है कि लगता है जैसे वे बुद्धिमान ही पैदा हुए थे। एक दशक लंबे अपने प्रधानमंत्री के कार्यकाल में भारत ने सबसे ज्यादा आर्थिक प्रगति दर देखी थी। जब वे पीएम बने थे उस समय यह बिल्कुल किनारे पर थी लेकिन कुछ ही महीनों में अपनी नीतियों के दम पर इन्होंने उसे गिरने से संभाल लिया।

इंदिरा गांधी शांति पुरस्कार वितरण समारोह में सोनिया ने पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने कभी अपना प्रचार नहीं किया। उन्होंने कभी किसी काम का श्रेय नहीं लिया। कार्यक्रम में सोनिया कई बार मनमोहन सिंह और नरेंद्र मोदी की तुलना करती दिखीं।

सोनिया गांधी ने कहा कि मनमोहन सिंह वे शख्स रहे हैं, जिन्होंने इंदिरा गांधी के साथ डेढ़ दशक तक काम किया। ये बड़ी-बड़ी बातें करने वाले नहीं, खुद की तारीफ करने वाले इंसान नहीं हैं। मनमोहन सिंह की तारीफ करते हुए सोनिया ने कहा कि उन्होंने कभी भी खुद के लिए कुछ नहीं मांगा। बाद में देश के प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने भारत के लिए दुनिया भर में सम्मान अर्जित किया। उन्होंने कहा कि आने वाले कई वर्षों तक हम मनमोहन सिंह की सलाह और मार्गदर्शन लेते रहेंगे।

एक दिन पहले ही छत्तीसगढ़ में पीएम नरेंद्र मोदी ने रैली करते हुए कांग्रेस परिवार पर करारा हमला किया था। पीएम मोदी ने भाषण में कहा था, 'मेरा सवाल है कि पांच साल के लिए इस परिवार से बाहर के एक व्यक्ति को अध्यक्ष बनाकर देख लीजिए। देश को पता है कि सीताराम केसरी दलित, पीड़ित और शोषित समाज से आए हुए व्यक्ति को पार्टी अध्यक्ष से कैसे हटाया गया था? कैसे बाथरूम में बंद कर दिया गया था? कैसे दरवाजे से निकालकर फुटपाथ पर फेंक दिया गया था? इसके बाद मैडम सोनिया जी को बैठा दिया गया था।'

इस पर कांग्रेस नेता अहमद पटेल ने ट्वीट कर लिखा कि क्या ये सच नहीं कि जब भारतीय जनता पार्टी के पहले और एकलौते दलित अध्यक्ष बंगारू लक्ष्मण का निधन हुआ तो उनके अंतिम संस्कार में लालकृष्ण आडवाणी के अलावा कोई और पार्टी का बड़ा नेता मौजूद नहीं था।