सूर्य ग्रहण के दौरान दान-ध्यान और तप-यज्ञ से पूरी होती हैं मनौकामनाएं


 नई दिल्ली (20 अगस्त): पौराणिक मान्यताओं के अनुसार सूर्यग्रहण के बाद पवित्र नदियों और सरोवरों में स्नान कर देवता की आराधना करनी चाहिए। 

- स्नान के बाद गरीबों और ब्राह्मणों को दान देने की परंपरा है। मान्यता है कि इससे ग्रहण के प्रभाव में कमी आती है। यही कारण है कि सूर्यग्रहण के बाद लोग गंगा, यमुना, गोदावरी आदि नदियों में स्नान के लिए जाते हैं और दान देते हैं।

- सनातन मान्यता के अनुसार, सूर्यग्रहण में ग्रहण शुरु होने से चार प्रहर पूर्व भोजन नहीं करना चाहिये। बूढ़े, बालक और रोगी एक प्रहर पूर्व तक खा सकते हैं। यह भी माना जाता है कि ग्रहण के दिन पत्ते, तिनके, लकड़ी, फूल आदि नहीं तोड़ना चाहिए। 

- कहा जाता है कि ग्रहण के समय की गयी सिद्धियां भी सफल होती हैं। पूजा-पाठ और यज्ञ हवन का प्रभाव भी सामान्य दिनों की अपेक्षा ज्यादा देखने को मिलता है। अधिकांश तांत्रिक भी ग्रहण के समय साधनाएं करते हैं।