भोपाल: खेतों से खोदकर गेहू के बोरियों में भरी जाती थी मिट्टी

नई दिल्ली (21 जुलाई): भोपाल में गेंहू के बोरियों में मिट्टी मिलाने की खबर चर्चा में है। दरअसल, यहां बाढ़ पीड़ितों के लिए राज्य सरकार ने गेंहू की बोरियां भिजवाईं, जिसमें 50 किलो गेहूं की बोरी में करीब 20 किलो मिट्टी निकली। इस बात के बाहर आते ही महकमें में हलचल मच गई। आनन-फानन में पीड़ितों से गेहूं वापस लेकर दूसरा गेहूं देने का ऑर्डर भी दिया गया। लेकिन तब तक खबर जंगल की आग की तरह दूर तक फैल चुकी थी।

मिलावट का यह गोरखधंधा एमपी स्टेट सिविल सप्लाई और एमपी वेयर हाउस कॉर्पोरेशन के कर्मचारियों की सांठ-गांठ से होता था। इसके तहत राशन दुकान से अफसरों ने 100 बाढ़ पीड़ितों को 50-50 किलो गेहूं और पांच लीटर कैरोसिन बांटा। मंगलवार को पीड़ितों ने गेहूं की बोरियां खोलीं तो उसमें मिट्‌टी के बड़े-बड़े ढेले निकले। कुछ ने गेहूं की बिनाई कराकर मिट्‌टी का वजन कराया तो वह 20 किलोग्राम निकला। यही नहीं अफसर जब गोदाम का निरीक्षण करने पहुंचे तो उन्हें गेहूं की 200 बोरियां अलग से तिरपाल से ढंकी मिलीं। इन बोरियों को हटवाया गया तो वहां 31 बोरी गेहूं मिट्टी की मिलावट वाला मिला। 

कैसे भरी गई मिट्टी गोदाम के कर्मचारी ने बताया कि भोपाल में बाढ़ प्रभावितों को गेहूं की सप्लाई करने का आदेश मिलने के बाद सिविल सप्लाई कॉर्पोरशन और वेयर हाउस कॉर्पोरेशन के अफसरों ने मिलावट वालीं 300 बोरियां लोड करवा दीं। नतीजतन बीपीएलधारकों को दिए जाने वाला मिट्टी मिला गेहूं राहत सामग्री के रूप में सप्लाई हो गया।

कहां से आती थी मिट्टी वेयर हाउस के एक कर्मचारी ने बताया कि वेयर हाउस कार्पोरेशन और एमपी स्टेट सिविल सप्लाई कार्पोरेशन के अफसरों ने आपस में सांठ-गांठ करके यहां रखीं बोरियों से गेहूं निकालकर उसकी जगह 15 से 20 किलो मिट्टी भरवा दी। यह मिट्टी गोदाम के नजदीक के खेत से खोदकर लाई जाती थी। निरीक्षण के दौरान मिलावट पकड़ में न आए, इसके लिए इन बोरियों को अच्छे गेहूं की बोरियों के नीचे दबाकर रखा जाता था।