सोहराबुद्दीन एनकाउंटर केस में कोर्ट ने सभी 22 आरोपियों को किया बरी

संकेत पाठक, न्यूज 24, मुंबई (21 दिसंबर): सोहराबुद्दीन केस में कोर्ट का फैसला आ गया है। सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने सभी 22 आरोपियों को बरी कर दिया है। स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने कहा कि यह बात सच नहीं है कि तुलसीराम प्रजापति की हत्या एक साजिश के तहत हुई। स्पेशल CBI जज ने अपने आदेश में कहा कि साजिश और हत्या साबित करने के लिए मौजूद सभी गवाह और प्रमाण संतोषजनक नहीं हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि परिस्थिति संबंधी साक्ष्य भी पर्याप्त नहीं है।

सीबीआई की विशेष अदालत ने करीब 13 साल पुराने इस मामले में सभी 22 आरोपियों को बरी कर दिया है। सीबीआई की विशेष अदालत के जज एसजे शर्मा ने अपने आदेश में कहा कि हमें इस बात का दुख है कि तीन लोगों ने अपनी जान खोई है। लेकिन कानून और सिस्टम को किसी आरोप को सिद्ध करने के लिए सबूतों की आवश्यकता होती है। साथ ही कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि सरकार और एजेंसियों ने इस केस की जांच करने में काफी मेहनत की, 210 गवाहों को पेश किया गया। लेकिन किसी भी तरह से सबूत सामने नहीं आ सके। उन्होंने कहा कि इसमें अभियोजन पक्ष की गलती नहीं है कि गवाहों ने कुछ नहीं बताया।

Image credit: Google

कोर्ट ने कहा कि सीबीआई इस बात को सिद्ध ही नहीं कर पाई कि पुलिसवालों ने सोहराबुद्दीन को हैदराबाद से अगवाह किया था। इस बात का कोई सबूत नहीं है। कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए सभी आरोपियों को बरी कर दिया है। सीबीआई की स्पेशल अदालत ने अपने फैसले में कहा है कि जो गवाह और सबूत पेश हैं वह किसी साजिश और हत्या को साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। इसके अलावा कोर्ट ने ये भी कहा कि परिस्थिति के अनुसार जो भी साक्ष्य पेश किए गए वह भी इसे सिद्ध नहीं करते हैं।  इसके अलावा तुलसीराम प्रजापति के साजिशन हत्या की बात भी गलत है। इसके साथ ही कोर्ट ने सभी 22 आरोपियों को बरी कर दिया। इससे पहले 5 दिसंबर को इस मामले की सुनवाई खत्म हो गई थी। 

आपको बात दें कि इस एनकाउंटर के कारण भारतीय राजनीति में काफी भूचाल आ गया था। बरी किए गए लोगों में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह (गुजरात के तत्कालीन गृह मंत्री), पुलिस अफसर डी. जी. बंजारा जैसे बड़े नाम शामिल थे। ये मामला पहले गुजरात में चल रहा था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इसे मुंबई ट्रांसफर कर दिया गया था। इस एनकाउंटर के कारण भारतीय राजनीति में काफी भूचाल आ गया था। इस मामले में कुल 37 लोगों को आरोपी बनाया गया था, जबकि साल 2014 में 16 लोगों को कोर्ट ने बरी किया था।