इंडिया करे सलाम: हेमंत पटेल हैं ना... सबको फ्री मिलेगा खाना

भूपेंद्र चौबे, अहमदाबाद (29 अगस्त): अपनों के लिए तो सभी जीते हैं लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जो अपनों अपनों के साथ दूसरों को भी खुशियां बांटते हैं। अहमदाबाद के हेमंत पटेल भी उन चंद लोगों में से हैं जो इंसानियत के लिए जीते हैं, हर रोज हेमंत अस्पताल के बाहर मरीजों और उनके रिश्तेदारों के लिए दोनों वक्त का खाना मुहैया कराते हैं। हेमंत काम उनकी पहचान बन गया है और वो अपने परिवार वालों के लिए किसी हीरो कम नहीं है।

दोपहर के 12 बजते हैं, तो इस अस्पताल में नज़रें किसी शख्स को ढूंढने लग जाती हैं। गेट की तरफ लोग इस उम्मीद से देखते हैं कि हेमंत पटेल आते ही होंगे और फिर सभी का पेट भरेगा। यहां रोजाना ये उम्मीद जागती है और रोजाना पूरी भी होती है। बड़े इत्मिनान से हेमंत पटेल लोगों को खाना खिलाते हैं कोई जल्दबाजी नहीं।

14 साल पहले हेमंत पटेल की बेटी बीमार थी। वो वक्त बेबसी भरा था, ना इलाज के लिए पैसे और ना ही खाने के लिए दस रुपए तक नहीं थे। जिससे अपनी बेटी को खाना खिला सके। कहा जाता है अक्सर गर्दिश का वक्त हौसले की दौलत दे जाता है। हेमंत पटेल ने उसी दिन से ठान लिया कि गरीबों और बेसहारों की मदद करनी है। हेमंत पटेल ने केटरिंग का काम शुरु कर दिया और लोगों को खाना खिलाना भी। हेमंत पटेल के काम पर पूरा परिवार फख्र करता है आज परिवार की नजर में हेमंत पटेल किसी हीरो से कम नहीं है।

अच्छाई की शुरुआत हो तो लोग खुद उससे जुड़ने लगते हैं पहल हेमंत पटेल की थी। लेकिन साथ देने आ गए उर्वेश शाह, बैंक से रिटायर हो चुके थे। लेकिन लोगों की सेवा के जज्बे से नहीं, साल 2008 से लगातार हेमंत पटेल के साथ खाना खिलाते हैं। इन्हीं की तरह पुष्पा जी भी हर महीने एक दिन के भोजन का इंतजाम करती है और खाना खिलाने भी आती हैं। इसके अलावा एक संस्था ने हेमंत का साथ दिया है।

हर महीने खाना खिलाने पर करीब 60 हजार का खर्च आता है, जिसका जिम्मा हेमंत पटेल पर है। मरीजों को दोनों वक्त गर्मागर्म खाना मिलता है। और हेमंत भाई पटेल को सुकून, हेमंत पटेल के लिए ही दुनिया की सबसे बड़ी पूंजी है। जिसे उन्होंने लोगों की दुआओं से कमाया है।