इसलिए पाकिस्तान जाएंगे गृहमंत्री राजनाथ सिंह...

नई दिल्ली (28 जुलाई): सार्क के इंटीरियर एंड होम मिनिस्टर्स की कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लेने के लिए राजनाथ सिंह 3 और 4 अगस्त को पाकिस्तान दौरे पर रहेंगे। कश्मीर में आतंकी बुरहान वानी के एनकाउंटर के चलते उपजे हालिया तनाव और जनवरी में पठानकोट हमले के बाद किसी भारतीय नेता का ये पहला पाकिस्तान दौरा होगा।

दोनों देशों के बीच तनाव भरे माहौल और तीखी बयानबाजी के बीच नजरें राजनाथ के इस दौरे पर होंगी, वे पाकिस्तान के पीएम नवाज शरीफ से भी मुलाकात करेंगे। जानकारी के मुताबिक भारत इस बैठक में 'आतंकवाद' के मुद्दे को उठाने वाला है ताकि पाकिस्तान पर दबाव बनाया जा सके।

बुधवार को ही कश्‍मीर घाटी में लश्कर के ज़िंदा पकड़े गए आतंकवादी सैफुल्लाह से पूछताछ से यह साबित हो चुका है कि घाटी में तनाव फैलने के लिए पाकिस्तान फ़िदायीन दस्ते भेज रहा है। सार्क बैठक में भारत जिंदा पकड़े गए आतंकियों की जानकारी भी साझा करेगा। साथ ही भारत का मकसद सदस्य देशों को इस बात की जानकारी देना भी है कि वह आतंकवाद के मुद्दे को लेकर पाकिस्तान से सहयोग कर रहा है,

पाक नेता और अफसरों से होगी चर्चा... - SAARC के इंटीरियर एंड होम मिनिस्टर्स की यह कॉन्फ्रेंस इस्लामाबाद में होगी। इसमें साउथ एशिया के देशों के नेता शामिल होंगे। - इस दौरान राजनाथ नवाज शरीफ सरकार के सीनियर नेताओं और अफसरों के साथ बातचीत भी करेंगे। - भारत सार्क देशों का अहम मेंबर है। इस कॉन्फ्रेंस में भारत की गैरमौजूदगी का नेगेटिव असर पड़ेगा। - इसी महीने जम्मू-कश्मीर में हिजबुल आतंकी बुरहान वानी के एनकाउंटर के बाद पाकिस्तान के रवैये का भारत ने खुलकर विरोध किया था। - पाक ने बुरहान को शहीद बताकर ब्लैक-डे का एलान किया था। - एक रैली में पीएम नवाज भी कह चुके हैं कि वह Pok को पाकिस्तान का हिस्सा बनाना चाहते हैं।

मोदी नवंबर में जा सकते हैं पाकिस्तान: - नरेंद्र मोदी भी सार्क सम्‍मेलन में हिस्‍सा लेने के लिए नवंबर में पाकिस्‍तान जा सकते हैं। - 9 और 10 नवंबर को 19th सार्क सम्मेलन इस्लामाबाद में होना है। इसमें भारत-पाक के साथ सार्क देशों के सभी बड़े नेता मौजूद रहेंगे। - इससे पहले पिछले साल दिसंबर में मोदी ने अचानक पाकिस्‍तान पहुंचकर सबको चौंका दिया था। - वे अफगानिस्तान से लौटते वक्त नवाज शरीफ के घर उनकी नातिन की शादी समारोह में शामिल हुए थे।

क्या है सार्क... - SAARC (साउथ एशियन एसोसिएशन फॉर रीजनल को-ऑपरेशन) साउथ एशिया के 8 देशों का आर्थिक और राजनीतिक संगठन है। - इसकी शुरुआत 8 दिसंबर, 1985 को बांग्लादेश की राजधानी ढाका में भारत, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल, मालदीव और भूटान ने मिलकर की थी।

सफलता से अधिक असफलताएं खाते में रहीं: - सार्क ने अब तक कुछ छोटे कदम उठाए हैं, लेकिन अब ज़रुरत है बड़े कदम उठाने की। - सार्क की स्थापना के 30 साल बाद इसे प्रतीकों से आगे बढ़ कर देखने की ज़रुरत है। सार्क विश्वविद्यालय हो या सार्क सैटेलाइट, इसे इसकी वास्तविक उपलब्धि नहीं कह सकते। - दक्षिण एशिया में तरक्की की संभावनाएं अनेक हैं, चाहे कच्चा माल हो या कार्यकुशल श्रम, यहाँ सब कुछ मौजूद है। - सार्क की स्थापना के उद्देश्यों में एक था इस क्षेत्र को ग़ुरबत से उठा कर विकास के रास्ते पर लाना। - सार्क का मक़सद था क्षेत्र में एकीकरण, बेहतर कनेक्टिविटी और आपसी व्यापार बढ़ाना। इसमे ख़ास सफलता नहीं मिली है। - इसके विपरीत यूरोपीय संघ एक कामयाब गुट है, जहाँ एक देश का नागरिक दूसरे देश में बग़ैर पासपोर्ट के घूम सकता है, रह सकता है, नौकरी कर सकता है और संपत्ति खरीद सकता है।

भारत की भूमिका: - सार्क देशों की संस्कृति और रीति रिवाज लगभग एक जैसे हैं। आपस में आम लोगों के बीच मतभेद भी अधिक नहीं हैं, लेकिन इसके बावजूद ये एक दूसरे से मीलों दूर हैं। - 2014 शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था - 'सिंगापुर और दुबई जाना सार्क देशों में जाने के मुकाबले अधिक आसान और सस्ता है।' - PM मोदी ने इस दिशा में पहल भी की है। शपथ ग्रहण के दौरान सार्क देशों के नेताओं को न्योता दिया और सबसे पहले नेपाल, भूटान का दौरा किया। - काठमांडू में भारत सरकार की तरफ से सार्क व्यापारियों को तीन से पांच साल तक का वीज़ा देने की पेशकश भी ऐतिहासिक कदम था। - इसके अलावा दक्षेस सैटेलाइट परियोजना- दक्षेस उपग्रह के निर्माण और प्रक्षेपण का खर्च भारत वहन करेगा जबकि इसकी जमीनी प्रणाली का खर्च इस क्षेत्रीय समूह के देश करेंगे।