'सेंट्रल यूनिवर्सिटीज़ से निष्कासित छात्रों के मुद्दे पर दखल नहीं'

नई दिल्ली (6 मई): केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने जेएनयू सहित कुछ केंद्रीय विश्वविद्यालयों के छात्रों के निलंबन के मुद्दे पर हस्तक्षेप से साफ इनकार किया है। ईरानी ने शुक्रवार को कहा कि  ये शिक्षण संस्थान स्वायत्त संस्थाएं हैं, इसलिए वह हस्तक्षेप कर नए विवाद नहीं खड़े करना चाहतीं।    रिपोर्ट के मुताबिक, मानव संसाधन विकास मंत्रालय के कामकाज पर हुई चर्चा का राज्यसभा में स्मृति ईरानी ने जवाब दिया। उन्होंने कहा कि वह संसद के पारित कानूनों से बंधी हैं। इसलिए वह विश्वविद्यालयों के प्रशासनिक निर्णयों में हस्तक्षेप नहीं कर सकतीं। इन मामलों में संबंधित विश्वविद्यालय का प्रशासन ही निर्णय कर सकता है। 

मंत्री ने कहा कि वह नहीं चाहतीं कि उनके हस्तक्षेप करने से नए विवादों का जन्म हो। कांग्रेस की तरफ से आनंद भास्कर रपोलू ने उनसे स्पष्टीकरण मांगते हुए सवाल किया था कि क्या कुछ केंद्रीय विश्वविद्यालयों की तरफ से पिछले दिनों कुछ छात्रों को निष्कासित करने के मामले में वह हस्तक्षेप करेंगी और प्रभावित छात्रों को राहत दिलवाएंगी?

केंद्र की तरफ से स्कूली पाठ्यक्रमों में हस्तक्षेप के आरोपों से इंकार करते हुए स्मृति ने कहा कि यह राज्य का विषय है। राज्य ही स्कूली पाठ्यक्रम तय करते हैं। हमारी भूमिका महज सुविधा प्रदाता की है। मानव संसाधन विकास मंत्री ने कहा कि सरकार देश के सभी सरकारी स्कूलों में बच्चों की निगरानी की प्रणाली (चाइल्ड ट्रैकिंग मैकेनिज्म) शुरू करने पर काम कर रही है।

गौरतलब है, जवाहरलाल नेहरू (जेएनयू) विश्वविद्यालय ने पिछले महीने उमर खालिद और अनिर्वान भट्टाचार्य को निष्कासित कर दिया था। इसके अलावा कन्हैया कुमार पर 10,000 रूपये का जुर्माना किया था। यह कार्रवाई उस विवादित कार्यक्रम में उनके कथित तौर पर शामिल होने को लेकर की गई। जो संसद पर हमले के दोषी अफजल गुरु की याद में कैम्पस में आयोजित किया गया था।