शहीद कर्नल के दोस्तों ने सीमा पर सैंनिकों के लिए भेजी मिठाई

नई दिल्ली ( 29 अक्टूबर ) : भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा पर तनाव है और पूर देश के लोग सेना के जवानों को दिवाली पर संदेश शुभकामना संदेश भेज रहे हैं। लेकिन पिछले साल उत्तर कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में नियंत्रण रेखा पर आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ में अपनी जान कुर्बान कर देने वाले महराष्ट्र के एक अधिकारी के सहपाठियों ने उनकी यूनिट के सैनिकों के लिए मिठाइयों के 400 पैकेट भेजे हैं। पिछले साल नवंबर में कश्मीर में नियंत्रण रेखा के पास कुपवाड़ा के हाजी नाका वन्य क्षेत्र में एक अभियान के दौरान 41 राष्ट्रीय राइफल्स के कमांडिंग अधिकारी कर्नल संतोष महादिक गंभीर रूप से घायल हो गए थे। बाद में अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी जान चली गई।

महादिक के एक सहपाठी ने पीटीआई भाषा से कहा, ‘300 किलोग्राम के मिठाई के डब्बे श्रीनगर हवाई अड्डे पर पहुंचे हैं और उन्हें उन सैनिकों के बीच वितरण के लिए 41 राष्ट्रीय राइफल्स में भेजा जा रहा है, जिन पर शहीद कभी कमांड करते थे।’कर्नल महादिक सतारा सैनिक स्कूल के छात्र थे। उनके इन सहपाठी ने कहा, ‘इससाल, हमने उनके साथी सैनिकों के बारे में सोचा जो प्रतिकूल मौसम और सीमापार से ही नहीं अंदर के भी दुश्मनों से जूझते रहते हैं। हमने सोचा कि यह सैनिकों के लिए एक सद्भावना होगी जो अपने परिवारों से दूर दिवाली मनाते हैं।’

महत्वपूर्ण 21 पारा स्पेशल फोर्सेज यूनिट के अधिकारी कर्नल महादिक को पूर्वोत्तर में 2003 में ऑपरेशन रिह्नो को लेकर वीरता का सेनापदक प्रदान किया गया था। महादिक की विधवा पिछले महीने 11 महीने के प्रशिक्षण के लिए एसएससीडब्ल्यू (गैर तकनीकी) के तहत ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकैडमी में शामिल हुई थीं। वह लेफ्टिनेंट के तौर पर सेना से जुड़ीं।

महादिक के दोस्त याद करते हैं वह बहुत अच्छे फुटबॉल गोलकीपर, कुशल घुड़सवार, बॉक्सर और हरफनमौला थे। कुपवाड़ा में बिल्कुल प्रतिकूल भौगोलिक स्थितियां, जिसकी वजह से कुपवाड़ा अभियान बड़ा चुनौतीपूर्ण था, होने के बावजूद कर्नल ने अपनी बटालियन की अगुवाई करने का चुनाव किया। महादिक के दोस्तों मनीष मनीडेरगी, गिरिधर कोले, दीपक पाटिल और शशिकांत वाघमोरे ने यह पहल शुरू की है जिसे वे ‘ऑपरेशन दिवाली’ कह रहे हैं।