अनोखी शादी: दुल्हे की बहन लाई बारात, भाभी के साथ निभाई रस्में, बदले नारियल-जयमाल

नई दिल्ली (6 मई): गुजरात के छोटा उदेपुर के एक गांव में मंगलवार को एक अनोखी शादी हुई। इस गांव में उस दिन पास के ही एक दूसरे गांव से बारात तो आई। लेकिन इस बारात में दुल्हा ही नहीं आया। बारात दूल्हे की बहन लेकर आई। इसके बाद उसी के साथ दुल्हन की सारी परंपराओं के साथ रस्में निभाई गईं।

यह अनोखी शादी सूरखेड़ा नाम के एक आदिवासी गांव में हुई। दरअसल, यह एक पुरानी और बेहद खास परंपरा है, जिसका यहां शादियों में पालन किया गया। इस परंपरा के मुताबिक, दूल्हे को शादी के दिन अपने घर पर ही रहना होता है। जबकि, उसकी अविवाहित बहन दुल्हन के घर जाकर वहां होने वाले सारी रस्मों में शामिल होती है। 

मंगलवार को सुरखेड़ा गांव में दूल्हा भरत अपनी शादी के दिन घर में ही रहा। जबकि, उसकी बहन वेचाली रतवा ने दुल्हन रजनी रतवा के साथ सभी रस्मों में भूमिका निभाई। इन दोनों ननद और भाभी ने नारियल और जयमाल आपस में बदले और अग्नि के चारों ओर सात फेरे लगाकर शादी की कसमें ली।

'इंडियन एक्सप्रेस' के मुताबिक, इस परंपरा से जुड़ी एक कहानी है। जिसमें बताया जाता है कि इस परंपरा का पालन करने वाले तीनों गांव सूरखेड़ा, सनादा और अम्बल के देवता अविवाहित थे। गांववालों का मानना है कि दूल्हे को घर पर ऱखने से उसे नुकसान से बचाया जा सकता है।

दूल्हे के जीजा नरेश रतवा एक प्राइमरी स्कूल में शिक्षक हैं। उन्होंने बताया, "यह परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। क्योंकि हमारे स्थानीय देवता अविवाहित थे। तो ऐसा माना जाता है कि पुरुषों को शादी की रस्में नहीं निभानी चाहिए। इसलिए, अविवाहित बहनें बारात की अगुवाई करती हैं और दुल्हन को घर में लाती हैं। इन तीन गांवों ने कभी भी दूल्हे को बारात ले जाते हुए नहीं देखा है।"

नरेश ने बताया, "इस परंपरा में दूल्हे को शादी के दिन दुल्हन के गांव में जाने भी नहीं दिया जाता है। वह दुल्हन से तभी मिल सकता है जब उसकी बहन उसे घर ले आती है।"

बहन की भूमिका तभी समाप्त हो जाती है जब वह उसे घर ले आती है। और अपने भाई को सौंप देती है। रिश्तेदारों के मुताबिक, "अविवाहित बहन अपने भाई के लिए एक रक्षा कवच की तरह काम करती है। जिसे बुरी आत्माएं परेशान कर सकती हैं।"