50 साल पहले बिछुड़े थे, फेसबुक ने फिर एेसे मिलाया...

नई दिल्ली (27मई): वो अब 85 साल की है। नज़र धुंधली और याददाश्त कमजोर हो चुकी है, लेकिन लगभग 50 साल पहले बिछुड़े भाई की खबर मिलते ही उनके दीमाग में फिर से सारी बातें ताजीं हो गयीं। आंखों में जैसे चमक आ गयी। केरल की रहने इयाथू ने जब यह सुना कि हमज़ा जिंदा है और वो कराची में है तो उनसे न रहा गया। उन्होंने तुरंत अपने छोटे भाई टीपी मन्नीकुट्टी से कहा कि किसी भी तरह एक बार हमजा़ से मुलाकात करवा दे।

दरअसल, हमज़ा और उसके परिवार को टीपी मन्नीकुट्टी के पौते नादिर शाह ने फेसबुक के जरिए खोज निकाला। नादिर शाह आजकल अबुधावी में है। फेसबुक पर उसकी दोस्ती कराची में रहने वाली आसिया से हुई। आसिया ने नादिर को बताया कि उसके अब्बू भी भारत में केरल के रहने वाले हैं। दोनों ने एक दूसरे से और भी बातें शेयर कीं तो पता चला कि दोनों सगे बुआ-भतीजे हैं। नादिर ने आसिया से हमज़ा के बारे में सारी जानकारी ली और अपने दादा टीपी मन्नीकुट्टी को बताया। टीपी मन्नीकुट्टी ने यह जानकारी 85 साल की बूढ़ी बहन इयाथू को दी और कहा कि हमज़ा जिंदा है और कराची में भरे-पूरे परिवार के साथ रह रहा है। दोनों तरफ से फोन पर बातचीत हुई और फिर अबुधाबी में पूरा परिवार लगभग 50 साल बाद इकट्ठा हुआ।

हमज़ा ने बताया कि उसे घूमने का शौक था, लेकिन मां कहीं जाने नहीं देती थी। 1950 की बात है, हमज़ा की उम्र महज 10-11 साल की थी।  एक दिन मां ने गाय बैलों को चराने भेजा तो वापस लौट कर नहीं आया। केरल से ट्रेन पकड़ी और कलकत्ता आ गया। कलकत्ता से बांग्लादेश और फिर वहां से कराची चला आया। 1968 में घर की याद ने जोर मारा तो हमज़ा जान की बाजी लगाकर राजस्थान बॉर्डर से घुसा और छिपते-छिपाते और तीन हफ्ते पैदल चलकर एक जगह से वो बस पकड़ कर हैदराबाद पहुंच गया। वहां एक जगह काम करने लगा और वहीं से मां को खत लिखा। मां ने पैसे भेजे और वो केरल आ गये।

नौ महीने तक घर रहने के बाद एक बार फिर हमज़ा घर से निकल पड़े और फिर कभी लौट कर घर नहीं आये। हमज़ा ने यह तो नहीं बताया कि वो वापस कराची कैसे और किस रास्ते पहुंचे, लेकिन इयाथू ने बताया कि मां हमजा़ का फोटो अपने तकिये के नीचे रखती थी और उसे देख-देख कर रोती रहती थी। इयाथू कहती है कि वो यह उम्मीद भी छोड़ चुकी थी कि वो हमज़ा को कभी देख भी पायेगी... इयाथू कहती है कि वो अब हमज़ा को कभी पाकिस्तान नहीं जाने देगी...लेकिन वो नहीं जानती केरल और कराची में अब बहुत फर्क आ गया है...कराची से केरल वापस आना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है।