छावनी में तब्दील होगा सिरसा डेरा, कल शुरू होगा तलाशी अभियान

राहुल प्रकाश, सिरसा (7 सितंबर): सिरसा के डेरा सच्चा सौदा में कल से सबसे बड़ा तलाशी अभियान शुरू होगा। पुलिस, सेना और अर्धसैनिक बलों के हजारों जवानों की मौजूदगी में ये ऑपरेशन चलेगा। लेकिन अब इस कार्रवाई में हुई देरी पर सवाल उठ रहे हैं।

गुरमीत राम रहीम को 25 अगस्त को रेप के मामले में दोषी ठहराया गया था। उसी दिन से सिरसा को छावनी में तब्दील कर दिया गया था। इसके अब 12 दिन बीत चुके हैं। ऐसे में सबसे बड़ी आशंका उन सबूतों को मिटाए जाने की जो राम रहीम के संगीन गुनाहों से जुड़े हैं।

आरोप लग चुका है कि डेरे के भीतर कई लोगों की हत्या हुई और उनकी लाशों को सिरसा ब्रांच नहर यानी भाखड़ में बहा दिया जाता था। सालों तक ये सिलसिला चलने के आरोप लगे हैं। कहा ये भी गया कि मारे गए कई लोगों को डेरे के भीतर ही दफन कर दिया गया। बलात्कारी बाबा पर संगीन गुनाहों को लेकर लगे ज्यादातर आरोप इसी डेरे से जुड़े हैं। यहीं राम रहीम पर साध्वी के साथ रेप करने का आरोप लगा।

कई लोगों का आरोप है कि उनके परिजन यहां आने के बाद से गायब हैं। उनका कोई अता पता नहीं। इस डेरे में बाबा के सैकड़ों भक्तों को नपुंसक बनाए जाने का आरोप है। यहां गुप्त तहखाने होने का खुलासा हुआ है। डेरे में बड़े पैमाने पर कालेधन को ठिकाने लगाने का शक है। इस डेरे को राम रहीम के गुनाहों का हेडक्वार्टर कहा जाता है। जहां ऐश की जिंदगी जीने वाला राम रहीम अपना खुद का कानून चलाता था।

आरोप है कि यहां राम रहीम ने ऐसे कुकर्म किए जिसकी सच्चाई डेरे की ऊंची चारदीवारी के भीतर ही रह गई। डेरा सच्चा सौदा से सटे इलाकों के लोगों की मानें तो इस बीच देर रात को बड़ी तादाद में यहां गाड़ियों की आवाजाही लगी रही। ये लोग कौन थे जो डेरे में लगातार आ और जा रहे थे इस पर सस्पेंस है।

राम रहीम के जेल जाने के बाद पीड़ित परिवारों को उम्मीद बंधी थी कि डेरे की फौरन तलाशी ली जाएगी। इसमें जरा भी देर नहीं होगी, क्योंकि देरी हुई तो बाबा के चेले सबूत मिटा सकते हैं। बावजूद इसके तलाशी में 10 दिन की देरी हो गई। राम रहीम को दोषी ठहराए जाने के ठीक बाद डेरे के साथ लगते 3 गांवों में एहतियातन कर्फ्यू लगा दिया गया था। शाहपुर बेगू, नेजिया और बाजेकां में 6 सितंबर को कर्फ्यू 14वें दिन भी जारी रहा।

डेरा के आस-पास के इलाके में सेना और अर्धसैनिक बल के जवानों को तैनात कर दिया गया। लेकिन डेरे के अंदर कोई पाबंदी नहीं रही। राम रहीम के हजारों भक्तों के डेरे को छोड़कर अपने घर जाने के बावजूद यहां सैकड़ों लोग फिर भी रहे। ये राम रहीम के करीबी लोग थे। शक है कि कहीं इनके जरिए गुनाहों के सबूतों को ठिकाने ना लगा दिया गया हो।

सैकड़ों एकड़ में फैले इस डेरे के चारोँ तरफ के इलाके पर वैसी निगरानी नहीं रखी गई कि परिंदा भी पर ना मार सके। ऐसे में गुफा में रहने वाले बाबा के चेलों ने कहीं किसी खुफिया दरवाजे से अहम सबूतों को गायब ना कर दिया हो।