सिंगापुर सख्त करेगा वीजा नियम, भारतीय IT कंपनियों की ऐसे बढ़ेगी मुश्किलें

नई दिल्ली (23 जुलाई): सिंगापुर आने वाले दिनों अपने वीजा नियमों को सख्त करने की योजना पर काम कर रहा है। दिल्ली इकोनोमिक्स सम्मेलन में हिस्सा लेने भारत पहुंचे सिंगापुर के उप-प्रधानमंत्री थर्मन शनमुगरत्नम कहा कि उनके यहां पहले से ही एक तिहाई श्रमबल विदेशी है लिहाजा इन पर रोक के बिना सिंगापुर में ढ़ाचेगत और नीतिगत विकास संभव नहीं है और सीमा को खुला रखना नासमझी भरा कदम होगा। यह गलत राजनीति होगी और गलत आर्थिकी भी होगी।

सिंगापुर के उप-प्रधानमंत्री का यह बयान भारत के लिए काफी अहम है। दरअसल भारतीय आईटी कंपनियां इस समूचे क्षेत्र में अपने ग्राहकों को सेवापूर्ति के लिए उसे द्वार के तौर पर इस्तेमाल करती हैं। TCS, HCL, इंफोसिस, विप्रो समेत सभी बड़ी भारतीय प्रौद्योगिकी कंपनियों की सिंगापुर में मौजूदगी है। सिंगापुर भारतीय प्रौद्योगिकी कर्मियों को वीजा जारी करने में रूढ़िवादी कदम अपना रहा है, ऐसे में कंपनियों के लिए अपनी श्रमशक्ति बनाए रखना लगातार मुश्किल हो रहा है। शनमुगरत्नम ने कहा कि 55 लाख जनसंख्या में 35 लाख सिंगापुरी नागरिक हैं। 


सिंगापुर उप-प्रधानमंत्री ने भारत में तेजी से रोजगार सृजन के लिए अविलंब श्रम सुधारों को बढ़ाने की जरूरत बताई है ताकि देश में उपलब्ध भारी श्रम बल जनसांख्यिकीय लाभ के बजाय संकट में तब्दील नहीं हो। उन्होंने यहां दिल्ली इकनॉमिक्स सम्मेलन में कहा, 'भारत की सबसे बड़ी चुनौती नौकरियों का सृजन है। यह आने वाले समय की असल चुनौती है, क्योंकि भारत पहले ही ढेर सारा वक्त गंवा चुका है, काफी वक्त निकल चुका है क्योंकि आपके पास कानून है, आपके पास रोजगार कानून है जो रोजगार विरोधी है।'