पहले से थी 'सिमी आतंकियों' के भागने की आशंका!

भोपाल(2 नवंबर): मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में जेल से फरार होने के बाद पुलिस के साथ मुठभेड़ में मारे गए सिमी से जुड़े आठ विचाराधीन कैदियों की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए देश की कई अदालतों में पेशी होती थी। मध्य प्रदेश के डीजीपी ऋषि शुक्ला ने बताया कि पुलिस को आशंका थी कि पेशी के लिए अदालत में ले जाने के दौरान ये लोग भागने की कोशिश कर सकते हैं और इसी वजह से उनकी पेशी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए होती थी।

- खंडवा में 2013 में जेल से कैदियों के भागने की घटना के बाद मध्य प्रदेश प्रशासन ने फैसला किया था कि सिमी से जुड़े विचाराधीन कैदियों को सुरक्षा कारणों की वजह से जेल से बाहर नहीं ले जाया जाएगा। 

- शुक्ला ने कहा, 'ये कैदी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए नियमित तौर पर अदालतों में पेश होते थे। ऐसा लगता है कि जेल से भागने की योजना काफी चालाकी से बनाई गई थी। हम अभी इसके घटनाक्रम की जांच कर रहे हैं।'

- हालांकि, इन विचाराधीन कैदियों के वकील परवेज आलम ने कहा कि इन कैदियों के खिलाफ चल रहे मामले काफी कमजोर थे। उनका कहना था, 'मैं यह जानना चाहता हूं कि पुलिस जेल की सीसीटीवी फुटेज हासिल क्यों नहीं कर रही। इससे यह स्पष्ट हो जाएगा कि वे खुद भागे थे या उन्हें भागने के लिए मजबूर किया गया था। अगर भागने में मदद करने वाला व्यक्ति उनके लिए नए कपड़ों, जूतों का इंतजाम कर सकता था, तो उसने एक गाड़ी का इंतजाम क्यों नहीं किया? यह कैसे संभव है कि वे सभी भागने के बाद एक साथ थे और पकड़े जाने के लिए 10-12 किलोमीटर दूर इंतजार कर रहे थे।'

-आलम ने कहा कि उन लोगों को जेल से भागने की जरूरत नहीं थी क्योंकि अदालत ने उन्हें रिहा कर दिया होता। उन्होंने बताया, 'पिछले छह वर्षों से मामले समाप्त नहीं हुए हैं। पुलिस जल्द सुनवाई के लिए गवाह या सबूत पेश नहीं कर सकी थी।' आलम, आठ विचाराधीन कैदियों में से सात के लिए पैरवी कर रहे थे। उन्होंने कहा, 'मारे गए लोगों के परिवार मेरे पास आए थे और वे न्याय चाहते हैं। हम इस घटना की न्यायिक या सीबीआई जांच के लिए मध्य प्रदेश हाई कोर्ट से गुहार लगाएंगे।'

-आलम ने बताया कि उन्होंने कभी जेल के अंदर सिमी के इन लोगों से मुलाकात नहीं की थी और उन्होंने डेढ़ महीना पहले अदालत की एक सुनवाई के दौरान विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उनसे बातचीत की थी। मध्य प्रदेश पुलिस के अनुसार, भोपाल की सेंट्रल जेल में सिमी से जुड़े 29 विचाराधीन कैदी और दोषी कैदी मौजूद हैं। सोमवार को जेल से भागे आठ कैदियों को अलग सेल में रखा गया था। इनके खिलाफ एटीएस के तीन कॉन्स्टेबलों की हत्या, बैंक डकैती और आतंकवाद से जुड़े मामले दर्ज थे।